Monday, 3 December 2012

सम्मोहन शक्ति

              

             सम्मोहन शक्ति 
              
                 (सूर्य विज्ञान) 
           
           जब हम खुली आँख से सामने हवा में देखते हैं तो एक काली सी तील लहराती हुई दिखती है। आप उस चंचल काली तील को स्पष्ट देखना चाहे तो कभी नहीं देख सकते और इसी कारण हमारी आँखों का निशाना प्रभावहीन बना रहता है। हम जो भी इच्छा बनाकर सामने देखते हैं तो उसमें कोई दम नहीं रहता, जबकि होना यह चाहिए कि आप जहाँ देखें आपके विचारों के मुताबिक परिणाम निकला करे।

          सम्मोहन आज के भौतिक युग में एक क्रांतिकारी विज्ञान है। इसके दवारा साधारण से लेकर अजीबो गरीब सैकड़ों कार्य किया जा सकता है। मानव प्राणी के अन्दर से हर समय सम्मोहन की तरंगें प्रवाहित होती रहती है। ये तरंगें नेत्र और हाथ की उंगुलियों से अदृश्य रूप में निकलकर ब्रह्माण्ड की इथर तरंगों में मिलते हुए विश्व व्यापक बनी रहती है। इसका उदाहरण है- आप अपने घर में बैठे बैठे दिल्ली या मुम्बई स्थित अपने किसी  मित्र या रिश्तेदार को याद करते हुए विचार बनाते हैं कि, क्या बात है, आज कल कोई खबर नहीं मिल रहा है उसका ?,  तब कुछ ही मिनट बाद आपका मोबाईल बज उठता है कि, हैलो. मैं फलाना बोल रहा हूँ, फलाने शहर से। खाली बैठा था तो सोंचा बात कर लूँ।

          अक्सर ऐसी घटनाओं को संयोग मान लिया जाता है। लेकिन यह संयोग बिलकुल नहीं है। यह आपके शरीर का शुद्ध विज्ञान है, साइंस है। इसे तरंग विज्ञान, एयर साइंस  कह सकते हैं। क्योंकि आपने मित्र को सोंचते हुए इच्छा बनाया, आपकी इच्छा में प्रबलता थी, यह इच्छा तरंग ब्रह्माण्ड के तरंग के जरिए मित्र की तरंगों से टकराई और तब मित्र न चाहते हुए भी आपको फोन कर डाला। इससे स्पष्ट हो रहा है कि किसी भी व्यक्ति को कहीं भी और कभी भी इच्छानुसार विचार भेजा जा सकता है। प्राचीन समय में भारतीय ऋषि मुनि ऐसे कार्य आसानी से संपन्न कर लेते थे। इसे टेलीपैथी ज्ञान भी कहते हैं। इसमें किसी प्रकार का कोई चमत्कार नहीं है। हमने देखा है कई बार लोग सम्मोहन के अधकचरे ज्ञान के चलते अपनी आँखें तक ख़राब कर लेते हैं।

           सूर्य आपार शक्तियोँ के मालिक हैं। अपनी आँखों में सम्मोहन की बिजली भरने के लिए सूर्य त्राटक आवश्यक है, किन्तु इसका अभ्यास सही मार्गदर्शन में नहीं किया गया तो आँखें चौपट भी हो सकती है। बिना सही ज्ञान अथवा बिना मार्गदर्शक सूर्य त्राटक करना उचित विचार नहीं है. त्राटक का अर्थ है, किसी एक बिंदु पर एक टक लगातार देखते रहना। दुनिया भर के वैज्ञानिक कहते हैं कि, उगते सूर्य की लालिमा लगातार देखने से आँखें स्वस्थ रहती है और चुम्बकीय उर्जा मिलती है। इसीलिए हमारी सलाह है, सूर्य त्राटक उगते सूर्य की लालिमा से ही  आरम्भ करना उचित है। धीरे-धीरे अभ्यास को बढ़ाते रहने से सफलता मिलती जाती है। यदि अपने शरीर के साधारण तरंगों को असाधारण बना लेते हैं तो आप दुनिया के किसी भी स्त्री पुरुष को सेकेंडों में सम्मोहित कर सकते हैं। 
               
          अपनी आँखों में सूर्य की शक्ति, सूर्य की लपक भरकर सम्मोहक और प्रभावशाली बनना चाहते हैं तो इसके लिए संस्थान द्वारा अभ्यास पैकेट तैयार किया गया है जिसे पूर्ण दिशा निर्देश सहित आपके नाम पते पर भेजने की व्यवस्था है। पैकेट में सम्मोहन अभ्यास से सम्बंधित  अति दुर्लभ सामग्रियां है, जिसके दवारा आप सहज सुगम विधि से सफलता की ओर बढ़ते ही चले जाएंगे।
         
         अतः सम्मोहन विज्ञान हर कोई समझे और लाभ उठाए।
शक्ति चक्र, क्रिस्टल बाल, हिप्नोलाइट यन्त्र, मनोकामना यन्त्र, वशीकरण यन्त्र तथा उपहार स्वरूप गले में धारण के लिए सम्मोहन उर्जा कवच ताकि अभ्यास के दौरान आप सुरक्षित रहें, वैसे भी सम्मोहन शास्त्र कोई जादू या तंत्र मंत्र नहीं बल्कि यह शुद्ध तौर पर शरीर और मन का विज्ञान है। 
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                                                                                            Dhanyavad      
                                                          Ashok Bhaiya   0-9565120423

4 comments:

  1. kiya hastmaithun karne se bramhcarya ka palan nahi hota hai jaise koi prayog sanivaar ko karna hai aur hastmaithun koi bhi din kare to

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    1. Nahi mere bhai ye vikar hai or panch makaaro me Gina jata hai . Tratak bhi ek sadhana hai or iske liye aapko ye SB tyagnaa pdega

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  2. kiya hastmaithun karne se bramhcarya ka palan nahi hota hai jaise koi prayog sanivaar ko karna hai aur hastmaithun koi bhi din kare to

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