Thursday, 25 July 2013

सम्मोहन शरीर का विज्ञान है



     सम्मोहन शरीर का विज्ञान है 

            
                (अदभुत ज्ञान अदभुत लाभ)

          ईश्वर ने मानव तन में तमाम शक्तियां सजा रखी है जिसे सक्रिय करके एक साधारण व्यक्ति भी संसार को चकित कर सकता है. इन शक्तियों से ब्रह्माण्ड में कहीं भी, कभी भी व्यक्ति के विचारों या प्रकृति के नियमों में हस्तक्षेप किया जा सकता है. चुंकि ये शक्तियां सुप्तावस्था में होती है अतः सामान्यतः आभास नहीं हो पाता. 

          परन्तु इन्हें जब कुछ विशेष योग, प्राणायाम और त्राटक विधि से विकसित करके चार्ज कर लिया जाता है तब दुनिया और जीवन के सभी असंभव, संभव हो उठते है. दरअसल मनुष्य के शरीर में हर समय सम्मोहन की तरंगें प्रवाहित होती रहती है. यह अदृश्य तरंगें हाथ की उंगुलियों के पोरुवे और नेत्रों के रास्ते बाहर निकलता रहता है. चुंकि तरंगें लुंज-पुंज कमजोर अवस्था में होती हैं इसी कारण जब दो व्यक्ति मिलते हैं तब थोड़ी ही देर में दोनों में से कोई एक, दूसरे वाले पर हावी हो चुका होता है. 

          क्योंकि सम्मोहन की अदृश्य उर्जा तरंगें किसी में अधिक तो किसी में कम होती है. परन्तु इन्हीं कमजोर तरंगों को किसी निजी मार्गदर्शन द्वारा अभ्यास करते हुए प्रबल, सशक्त और चुम्बकीय बना लिया जाता है तब नेत्र द्रष्टि जिस भी व्यक्ति या जीव प्राणी पर पड़ता है, वह व्यक्ति या प्राणी स्वयं को निर्बल असहाय महसूस करते हुए आपकी ही आज्ञा और इशारों को मानने पर वाध्य हो जाता है और यह मानव जीवन की महाश्रेष्ठ उपलब्धि है जो आज भी सुलभ है.  

          ऐसी शक्ति तो हर मूल्य चुकाकर भी प्राप्त कर लेनी चाहिए. विज्ञान के पास आज भी ऐसी कोई दवा, इंजेक्शन या व्यवस्था नहीं है जिससे सम्मोहन की अद्भुत उर्जा शक्ति किसी को उपलब्ध करा दे। जबकि गुढ़ विद्द्याओं के चलते यह अब भी संभव है और यह आपका सौभाग्य है, आज इस रहस्यमय ज्ञान की जानकारी प्राप्त हो रही है. अपने अन्दर की सामान्य उर्जा तरंग को असाधारण बनाने के लिए जो प्राचीन विधि है, उसे त्राटक कहते हैं. अर्थात बिना पलक झपकाए किसी बिंदु पर एक टक देखते रहना.

          सम्मोहन से किसी को भी अपने पूर्ण वश में किया जा सकता है. मुर्ख से मुर्ख बालक या व्यक्ति को चतुर बनाया जा सकता है. सम्पूर्ण बिमारियों का इलाज किया जा सकता है. किसी की खोई हुई यादाश्त लौटाई जा सकती है. हिंसक जीव-जंतु, पशु-पक्षियों को पालतू बनाया जा सकता है. लोगों की आपसी रंजिस सदा के लिए ख़त्म की जा सकती है. खोये हुए व्यक्ति का पता लगाकर उसे वापस बुलाया जा सकता है. किसी के भी विचार को बदला जा सकता है. किसी भी पुरुष या स्त्री से अपनी बात मनवाई जा सकती है. बिजनेश व्यवसाय में  तरक्की की जा सकती है. देवी-देवता और इष्ट से आशीर्वाद प्राप्त किया जा सकता है. 

          सम्मोहन का प्रयोग करना किसी भी तरह से टोना टोटका या कोई गलत प्रक्रिया नहीं है, यह विशुद्ध रूप से मानव शरीर में स्थित हिप्नोटिक तरंगों का ही कमाल होता है जिसकी मेन स्विच प्रयोगकर्ता के मस्तिष्क में फिट रहता है. सम्मोहन के श्रेष्ठ ज्ञाताओं में अनेक देवी-देवता और महापुरुषों के नाम उल्लेखित है. हालाँकि इसके जानकार अब बहुत कम रह गए हैं दुनिया में. किन्तु जो है वो इस धरती के धरोहर हैं. ज्ञान का प्रसार होना उचित माना गया है. इसे छुपाना अथवा नजरअंदाज करना संत ऋषि और ज्ञानियों की दृष्टि में घटिया सोंच है अतः आपके लिए सम्मोहन ज्ञान व्यक्तिगत रूप से मार्गदर्शन की व्यवस्था रखी जा रही है. 

नोट- यह आपार हर्ष का विषय है कि, हमने अपने पूर्व सूचना के मुताबिक त्राटक ज्ञान के साथ सम्मोहन, वशीकरण, कुंडलिनी जागरण का 30 से 45 दिनों का विशेष कोर्स जारी कर दिया है। इस दुर्लभ त्राटक सम्मोहन कोर्स को अनेक प्रांतों के भाई बंधु और शुभचिंतक लगन पूर्वक कर रहे हैं। अतः मंगल कामना हैं इनकी सफलता के लिए तथा आपके लिए हार्दिक कामना है आपके आगमन के लिए। क्योंकि आप दुनिया से बहुत कुछ हासिल कर सकते हैं परन्तु ऐसा अद्भुत और दुर्लभ ज्ञान कहीं और से प्राप्त करना बहुत ही कठिन है। नामुमकिन भी मान लीजिये। इस सम्बन्ध में किसी भी जानकारी के लिएआप बेहिचक हमें फोन कर सकते हैं। आपको हमारा भरपूर सहयोग प्राप्त होगा, भरोसा रखें।    
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          हमने इस साईट पर पहले भी सम्मोहन वशीकरण और कुण्डलिनी जागरण के सम्बंध में कुछ प्रेक्टिकल लेख दे रखी है. उन्हें काफी पसंद किया जा रहा है. देश भर से सम्मोहन विज्ञान को सिखने समझने की इच्छा जाहिर की गई. फिर हमने सार्वजनिक तौर पर घर बैठे सम्मोहन शिक्षा का समुचित मार्गदर्शन देने का विचार बना लिया। यह आपके लिए सौभाग्य की बात है. आप कार्यालय को फोन करके अपना सम्मोहन प्रशिक्षण पैकेट प्राप्त कर सकते हैं. आपको व्यक्तिगत मार्गदर्शन एवं परामर्श के लिए हम वचनवद्ध हैं. 
         नोट- हमारे इस साईट पर सम्मोहन वशीकरण से सम्बंधित सभी लेखों को पढ़ने के बाद ही हमें फोन करें तो सुविधाजनक होगा।
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Wednesday, 17 July 2013

फोटो सम्मोहन गोपनीय विधि




   फोटो सम्मोहन गोपनीय विधि

                      
                      (प्रामाणिक लेख)


          वशीकरण का तात्पर्य सम्मोहन क्रिया से है। प्राचीन ग्रंथों में सम्मोहन को ही वशीकरण कहा गया है जो कभी भी, किसी के लिए भी किया जा सकता है। पशु-पक्षी, जीव-जंतु, मनुष्य या देवी- देवता, सभी पर सम्मोहन क्रिया संपन्न किया जा सकता है। इसमें कोई भेद या अनुचित नहीं है। किसी को सम्मोहित या वशीकरण करना किसी प्रकार से गुनाह अथवा पाप नहीं है।

          यह तो एक आवश्यकता है जिसे हर किसी को करना ही चाहिए। अतः ऐसे ज्ञान का उपयोग स्वस्थ मस्तिष्क से प्रत्येक व्यक्ति को करना चाहिए और इस विज्ञान की क्षमता को परखनी चाहिए। किसी को भी अपने वशीभूत करने के लिए प्राचीन ग्रंथों के अनुसार भिन्न-भिन्न प्रयोग है परन्तु फोटो के माध्यम से सम्मोहन या वशीकरण हेतु एक गोपनीय और सरल विधि प्रस्तुत किया जा रहा है। जिस पुरुष या स्त्री, अधिकारी, नौकर, मालिक,  प्रेमी या प्रेमिका या किसी को भी वश में करना हो तो उसकी एक तस्वीर अपने पास रखें तथा सिद्ध किया हुआ वशीकरण यन्त्र प्राप्त कर लें। 

          शुक्रवार की प्रातः 6 बजे या रात्रि को 12 बजे शांत-एकांत कमरे में सफ़ेद वस्त्र के आसन पर एकाग्रचित होकर बैठ जाय। सामने स्वच्छ वस्त्र पर फोटो और वशीकरण यन्त्र पास-पास रखें। कोई सुगन्धित अगरबती जला लें। अब यन्त्र को पूरी आत्मियता से देखते हुए मन में ऐसी धारणा बनाएं कि, आपकी आतंरिक उर्जा को यन्त्र के माध्यम से कोई आकर्षण शक्ति प्राप्त हो रही है जो किसी को भी सम्मोहित कर देने में क्षमतावान है। अब उस फोटो की दोनों आँखों के मध्य, जहाँ बिंदी या तिलक किया जाता है, वहां दृष्टि जमाते हुए निम्न मंत्र का 21 बार शुद्ध स्फटिक माला अथवा लाल चन्दन की माला से शुद्ध उच्चारण करें। 

                   मंत्र-           ॐ रं श्रृं अमुकं वश्यमानाय हुं। 
               
                                                          (अमुकं के स्थान पर व्यक्ति का नाम लें)

          उच्चारण पूर्ण होने के बाद यन्त्र को स्वच्छ वस्त्र में ही बांधकर किसी बहती नदी तालाब में विसर्जित करके बिना पीछे देखे वापिस आ जायं। अगले 36 घंटे के मध्य में आप अनुभव करेंगे कि, आपकी सफलता आपके निकट आने को लालायित है। यही नहीं, अनुभव में यह भी आयेगा कि, आपके सम्मोहन में वशीभूत अधिक से अधिक लोग आपके निकट आने को वेताब हैं। बातचीत करने को उतावले हैं। और जब वार्ता होती है तब आपकी हर बात वो मानने को विवश से हैं। 
(नोट- गलत मानसिकता से इसका प्रयोग उलटा या अनुचित परिणाम भी दे सकता है)

          यह एक प्रामाणिक प्रयोग है। इसका लाभ कई लोगों ने उठाया है। क्योंकि वशीकरण यंत्र स्वयं सिद्ध यन्त्र होता है, जिसके सम्मुख वशीकरण मंत्र का शुद्ध उच्चारण किया जाता है तो फोटो वाले व्यक्ति की मानसिक तरंगें प्रयोगकर्ता के इच्छा का पालन करने लगती है तथा शुद्ध विचार से किया गया प्रयोग यथा शीघ्र परिणाम प्रकट कर देता है। एक बार एक चाय के दुकानदार ने बार-बार भाग जाने वाले अपने नौकर को टिकाऊ बनाने के लिए यह प्रयोग किया तो नौकर अपने मालिक की हर बात प्यार से मानने लगा। बाद में वह नौकर इतना अच्छा सेवक निकला कि, मालिक ने ही उसका व्याह कराकर अपना पुत्र मान लिया। 

          यह वशीकरण यन्त्र के प्रभाव का ही कमाल था। वैसे भी सम्मोहन शरीर का ही विज्ञान है। यह तो दुनिया भर के वैज्ञानिकों ने भी सिद्ध कर दिया है कि, मानव तन के अन्दर कोई ऐसी उर्जा तरंग है जो हर क्षण बाहर नकलती रहती है और वातावरण को प्रभावित करती रहती है। यदि उस तरंग को भारतीय पद्धति से और विकसित कर लिया जाय तो पूरी दुनिया में तहलका मचाया जा सकता है, इसमें कोई दो राय नहीं। अतः इस प्रकार के प्रयोग निःसंकोच करके हर किसी को सकारात्मक लाभ उठाना चाहिए। आपको इस प्रयोग में पूरी सफलता मिले, हमारी मंगल कामना है। (आवश्यक जानकारी हेतु फोन कर लें)

नोट- यह आपार हर्ष का विषय है कि, हमने अपने पूर्व सूचना के मुताबिक त्राटक ज्ञान के साथ सम्मोहन, वशीकरण, कुंडलिनी जागरण का 30 से 45 दिनों का विशेष कोर्स जारी कर दिया है। इस दुर्लभ त्राटक सम्मोहन कोर्स को अनेक प्रांतों के भाई बंधु और शुभचिंतक लगन पूर्वक कर रहे हैं। अतः मंगल कामना हैं इनकी सफलता के लिए तथा आपके लिए हार्दिक कामना है आपके आगमन के लिए। क्योंकि आप दुनिया से बहुत कुछ हासिल कर सकते हैं परन्तु ऐसा अद्भुत और दुर्लभ ज्ञान कहीं और से प्राप्त करना बहुत ही कठिन है। नामुमकिन भी मान लीजिये। इस सम्बन्ध में किसी भी जानकारी के लिएआप बेहिचक हमें फोन कर सकते हैं। आपको हमारा भरपूर सहयोग प्राप्त होगा, भरोसा रखें।    
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                                                                                          -अशोक श्री    9565120423 

Wednesday, 10 July 2013

जीवन का महाउपहार



           तरक्की का तरीका 

              (सिद्ध शुद्ध एवं प्रामाणिक)


          माँगना, छिनना या चोरी से प्राप्त किए गए वस्तु को उपहार नहीं कहते। उपहार उसे कहते हैं जो स्वच्छ मन और साफ़ ह्रदय से कोई किसी को देता है और तब एक छोटा सा उपहार भी प्राप्तकर्ता के जीवन में सौभाग्य भर देती  है। आज आपको हमारी ओर से एक दुर्लभ उपहार दिए जाने की घोषणा की जा रही है। इस अवसर को खोइएगा नहीं। क्योंकि आपको प्राप्त होगा श्री धन लक्ष्मी कुबेर धन वर्षा यन्त्र पैकेट। ग्रहण सिद्ध यह उपहार आपके नाम या गृह स्वामी के नाम से सिद्ध करके ही जाएगा। इसे स्थापित करने के बाद से ही देखेंगे प्रभावशाली पावर।  

          तरक्की का अर्थ है, घर परिवार सुख शांति और समृद्धि से लबालब हो। जीवन के हर मामलों में शुभ-शुभ विस्तार हो। बिजनेस, व्यवसाय और सर्विस में प्रोग्रेस हो। किसी प्रकार का ऋण का बोझ न हो, यदि हो भी तो आसानी से समाप्त हो जाय। परिवार रोगमुक्त हो, वहां सुख-शांति की छाया हो। लक्ष्मी का आशीर्वाद हो और चारों ओर से धन आगमन की स्थिति बनती हो। बिगड़ा कार्य भी आकस्मिक रूप से संभल जाता हो। समाज में मान-मर्यादा और प्रतिष्ठा हो। अगर न हो तो अभिमान जैसी नकारात्मक भाव आपके पास न हो। मन में किसी के प्रति ईर्ष्या न हो। 

          परन्तु आज कहाँ देखने को मिलता है ऐसा घर परिवार। हर तरफ हाहाकार है। सभी किसी न किसी मुसीबत से चिंतित हैं। समस्या कहाँ से उत्पन्न होती है ? तो सीधी सी बात है। धनाभाव में। और धन का आभाव क्यों  है? लक्ष्मी के प्रसन्न होने के कारण। इसके और भी कई कारण हो सकते हैं। आपके मकान की भूमि दोष, वास्तु दोष, ऋण दोष, बिमारी दोष आदि आदि। अतः किसी नजरिए से देखा जाय तो यहाँ भगवती लक्ष्मी की मेहरबानियों की सख्त आवश्यकता है वरना दाल रोटी तो कोई भी खाकर गुजारा कर सकता है। किन्तु यह संतुष्टि वाली बात नहीं है। लक्ष्मी को प्रसन्न करना आवश्यक भी है, जिम्मेदारी भी है।

          और लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए श्री कुबेर जी को प्रसन्न करना होता है। इन्हें प्रसन्न करने के लिए ज्यादे चिंता की बात नहीं है। बल्कि ग्रहणकाल में पूरे विधि विधान से सिद्ध किया हुआ कुबेर कुंजी के साथ स्फटिक लक्ष्मी श्रीयंत्र और सम्पूर्ण दोष मुक्ति महायंत्र की स्थापना अपने पूजा स्थान में स्थापित करना होता है। अर्थात इन सामग्रियों को बताये हुए विधि से स्थापित करें, फिर तो लक्ष्मी की कृपा देखते बनती है, क्योंकि लक्ष्मी का वशीकरण हो चुका होता है और कृपा की फुहारे परिवार को ऐसे भिंगोने लगती है कि, जीवन की हर अभिलाषाएं पूरी होकर सुख -शांति और तरक्की से सौभाग्य खिल उठता है।  

          इसीलिए शास्त्रों में कहा गया है कि, जहाँ धनपति भगवान् कुबेर जी होंगे, वहा लक्ष्मी को आना ही होगा। अब इसमें कोई दो राय नहीं कि, ऐसी घटना घटित होने पर दुर्भाग्य का नाश तो हो ही जाता है। इसलिए आपके घर परिवार की समस्याएँ ख़त्म होकर वहा सुख-शांति और लगातार तरक्की का अवसर बनता है। अतः दुर्भाग्य का रोना धोना त्यागिये। अब नए सिरे से कुछ करने को तैयार हो जाइए, कदम कदम पर हम आपके साथ हैं। हमारी सलाह आपके लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। 

          किसी भी कार्य की सफलता में व्यक्ति का विश्वास, श्रद्धा ही प्रथमतः रूप से कार्य करता है। अतः आज और अभी, पूरी श्रद्धा विश्वास से स्थापना का मन में विचार बना लें तभी से संकेत मिलने लगेगा कि आपके यहाँ लक्ष्मी चरण पधारने वाला है। अर्थात अब से कुछ अलग होने वाला है। इससे लक्ष्मी का भी सम्मान होता है और जहाँ सम्मान होता है, वहा लक्ष्मी का स्थायित्व बनता है। थोड़े समय में ही जो देखता है दांतों तले उंगुली दबा लेता है, हर तरफ आपकी तरक्की की खुसर-फुसर शुरू हो जाती है।

          अतः यह सर्व सफलता पैकेट आपको इसके सेवा शुल्क में सुविधा दी जा रही है। घर में घर के मुखिया के नाम सिद्ध करके ही जायेगा ताकि रोग शोक, दुःख दरिद्रता का नाश होता है। इसके स्थापना से कर्ज से मुक्ति मिलती है। कोर्ट कचहरी मुकदमें  में विजय मिलता है। बिजनेश सर्विस में तरक्की निश्चित हो जाती है। भूमि दोष व् वास्तु दोष दूर होकर घर में वंश वृद्धि के योग बनते हैं। तंत्र मंत्र और नजर का भय दोष ख़त्म होता है। आकस्मिक दुर्घटनाओं से रक्षा होती है। घर में सुख-शांति अनायास ही प्राप्त होने लगती है। सामाजिक प्रतिष्ठा मिलती है और अच्छे लोगों से सम्बन्ध बनते हैं। 
                                              इस सम्बन्ध में अन्य परामर्श ले सकते हैं, - अशोक भैया  95651220423
                                                                          हमारा जीमेल एड्रेस ashokbhaiya666@gmail.com
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Wednesday, 3 July 2013

सोना बनाना सहज सम्भव है.

           

            सोना बनाने का रहस्य 


          यह सौभाग्य की बात है कि, आज आपको नेट के जरिए सोना बनाने का आसान रहस्य बताया जा रहा है. इसके आधार पर कोई भी व्यक्ति विभिन्न सामग्रियां जुटाकर, पूरे आत्मविश्वास के साथ अपनी हाथों से जितना चाहें शुद्ध सोने का निर्माण अपने घर में ही कर सकता है. 
          
          दुनिया में कुछ भी नामुमकिन नहीं है. नामुमकिन उनके लिए है जो हाथ पर हाथ धरे बैठे रहते हैं. या जो बड़े-बड़े ख्वाब देखते रहते हैं तथा ख्याली पुलाव के बारे में सोंचते रहते है. किन्तु आज मैं स्वर्ण निर्माण की चर्चा भी कर रहा हूँ और बनाने की तकनीक भी समझा रहा हूँ. आप थोड़ा हैरान, थोड़ा उत्सुक जरुर हो सकते हैं परन्तु यह हैरान होने का विषय नहीं है. बस आप इसे पहले ध्यान से समझ लें .  
          
          आज भी कई ऐसे नाम गिनाए जा सकते हैं जो पूर्वकाल में स्वर्ण निर्माण के क्षेत्र में विख्यात रहे है.  इनके नाम क्रमसः इस प्रकार से है. प्रभु देवा जी, व्यलाचार्य जी, इन्द्रधुम जी, रत्न्घोष जी इत्यादि स्वर्ण विज्ञान के सिद्ध योगी रहे हैं.  अपने आप में ये पारद सिद्ध योगी माने जाते रहे हैं. प्राचीन ग्रंथों में स्पष्ट चर्चा है. किन्तु भारतीय एक नाम है नागार्जुन का, जो स्वर्ण विज्ञानी के रूप विख्यात रहे है.  
          
          आज भी भारत वर्ष के सुदूर प्रान्तों में. इसके जानकार योगी, साधक हो सकते हैं जो सोना बनाने का दुर्लभ ज्ञान रखते हैं. ऐसे ही नामों में अद्भुत और पवित्र एक नाम है, पूज्य श्री नारायण दत्त श्रीमाली जी . जो १३  जुलाई  सन् १९९८  को इच्छा मृत्यु प्राप्तकर सिधाश्रम प्रस्थान कर गये. किन्तु अपने पीछे अनेक दीपक रोशन कर  छोड़ गए हैं, जो जहाँ भी है समाज कल्याण करने में  सक्षम और निरंतर कार्यशील है. 
          
          जैसाकि विभिन्न विधियों से स्वर्ण निर्माण की चर्चा होती आई है तथा पूर्व समय में कई रसाचार्यों ने समाज के सामने सोने का निर्माण करके चकित कर दिया. ६ नवम्बर सन १९८३ ई० साप्ताहिक हिंदुस्तान के अनुसार  सन १९४२ ई० में पंजाब के कृष्णपाल शर्मा ने ऋषिकेश में मात्र ४५  मिनट में पारा से दो सौ तोला सोने का निर्माण करके सबको आश्चर्य में डाल दिए. उस समय वह सोना ७५ हजार रूपए में बिका, वह धनराशि दान कर दी गई. 
          
          उस समय वहां महात्मा गाँधी, उनके सचिव श्री महादेव देसाईं, तथा श्री युगल किशोर बिड़ला जी उपस्थित थे. इससे पहले २६ मई सन १९४० में भी कृष्णपाल शर्मा ने दिल्ली के बिड़ला हॉउस में पारे को शुद्ध  सोने में बदलकर दिखा दिया था. उस समय भी वहा विशिष्ट गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे. और आज भी इस घटना का उल्लेख बिडला मंदिर में लगे शिलालेख पर मिलता है. 
   
         नागार्जुन का नाम तो स्वर्ण विज्ञानी के रूप में खासा प्रसिद्ध रहा है. उन्हें तो पारा से सोना बनाने में महारत हासिल थी. उनके लिखे कई महत्वपूर्ण ग्रन्थ मौजूद है. जिनका अध्ययन करके पारे के दवारा अपनी हाथों से सोना कोई भी बना सकता है. नागार्जुन एक अति विशिष्ट व्यक्तित्व रहे हैं, नागार्जुन के जीवन  की  संघर्ष कथा किसी अगले पोस्ट में जरुर दूंगा.    
    
         अब मैं स्वर्ण निर्माण के चर्चे पर आता हूँ जिसे सिख समझकर आप भी उत्साहपूर्वक अपनी हाथों से सोना बनाएं. यह विधि त्रिधातु पात्र विधि कही जाती है. इसके लिए तीन अलग अलग धातुओं को मिलाकर पहले एक कटोरानुमा बर्तन तैयार किया जाता है.  इस बर्तन को स्वर्ण पात्र भी कहते है. 

निर्माण विधि -
      
          अर्थात लोहा 500 ग्राम, पीतल 500 ग्राम, और कांसा 500 ग्राम, तीनों धातु शुद्ध हो, सही हो ध्यान रखें. तीनों धातुओं को अलग-अलग पिघलाएं तथा पिघल जाने पर उन्हें आपस में मिक्स करते हुए किसी कटोरे या कढाई का रूप दे दें. ध्यान रहे उस बर्तन में कहीं छेद न हो और मात्रा सही हो. ऐसा बरतन बनाने में दिक्कत हो तो किसी बनाने वाले से बनवा लें. बरतन बन जाने के बाद उसे रख लें और बाजार में किसी विश्वसनीय पंसारी की दुकान से 200 ग्राम गंधक, 200 ग्राम नीला थोथा (तुतिया),  200 ग्राम नमक और 200 ग्राम कुमकुम (रोली) तथा रससिंदूर खरीदें साथ ही विश्वसनीय स्थान से ही 100 ग्राम शुद्ध पारा और शहद खरीद लें. ध्यान रहे- गंधक को सभी जानते हैं . नीला थोथा जिसे तुतिया भी कहते हैं .यह नीले रंग में पूरी तरह जहर होता है . 
          
          अब सभी सामग्रियां इकट्ठी करके गंधक, नीला थोथा, नमक और रोली अलग अलग कूट-पीसकर आपस में मिलादें और एक किलो ताजे पानी में इसे घोल दें. इसके बाद चूल्हे या स्टोव पर आग जलाए और त्रिधातु बर्तन में गंधक, नीला थोथा, नमक और रोली वाले मिश्रण को डालकर धीमी आंच पर पकने दें. जब पानी उबलने लगे तो 100 ग्राम पारा को रससिंदूर में अच्छी तरह घोंटे. फिर उसकी गोली बनायें और उसके ऊपर शहद चिपोड़ दें. अब उसे खौलते पानी (सामग्रियों) के बीच धीरे से रखें. जब दो तिहाई भाग पानी जल जाए तो बीच में पक रहे गोले पर ध्यान दिए रहें जो हल्का-हल्का सुनहलापन होना शुरू होगा. जब वह पूरी तरह सुनहला दिखने लगे तब बर्तन को नीचे उतार लें. आपके परिश्रम की बदौलत शुद्ध सोने का निर्माण हो चुका होगा,  श्रद्धा पूर्वक उसका नमन करे.  

सावधानियां -

१- नीला थोथा शुद्ध रूप से जहर है, इसे छुने के बाद हर बार हाथ धो लिया करें. 
२- गंधक भी कुछ इसी प्रकार का पदार्थ होता है, छुने के बाद हाथ धोलें .
३- पारा अति चंचल द्रव्य होता है, जमीन पर उसे गिरने से बचाएं.
४- सामग्री पकाते समय आँखों को किसी विशेष चश्मे से ढका हुआ रखें.

          इस प्रकार सामग्री की शुद्धता और सावधानियों को ध्यान में रखकर पारद यानी पारा के द्वारा स्वर्ण बनाया जाता है. आप पूरे आत्मविश्वास के साथ सोने का निर्माण कर सकते हैं. हमारी मंगल कामना आपके साथ है. 

          भारत वर्ष का सौभाग्य है कि, यहाँ एक दो नहीं, स्वर्ण बनाने की अनेकों विधियाँ पूर्व संयोजित है. संतों और ऋषियों की कृपा ही है जो अनमोल थाती के रूप में इस देश को सौंप गए हैं तथा ऐसे दिव्य ज्ञान प्राप्त करके भी कोई गरीबी और निर्धनता का रोना रोए तो इसे महा दुर्भाग्य ही माना जाएगा.
          इस लेख के पाठकों को सलाह है,- प्रस्तुत स्वर्ण निर्माण विधि प्रमाणिक विधि है. स्वर्ण निर्माण में रूचि लेने वाले बंधुओं को निर्देश का पालन करते हुए प्रयोग करना चहिये. सामग्रियां शुद्ध व् सही  हो. निर्माण विधि और निर्माण समय भी महत्व रखता है. यदि पहली बार में सफलता न मिले तो कहीं न कहीं त्रुटी जरुर मानिये. आप दूसरी बार  प्रयास कीजिये, तीसरी बार कीजये. क्योंकि जो सच है उसे प्रकट होना ही है. विश्व विख्यात स्वर्ण विज्ञानी नागार्जुन १७ वर्ष की उम्र में ही घर परिवार के मोह बंधन से निकलकर स्वर्ण निर्माण शोध में निमग्न हो गए थे. उनके सामने सुविधाएँ भी कम थी और समस्ययाओं का ताँता होता था.उन्हें सफलता ७० साल की उम्र में प्राप्त हुई. अतः आत्मविश्वास भरा प्रयास व्यक्ति को सफल बनाता है.   
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                 अशोक श्री -9565120423 Rishikesh, Delhi, Mau, ballia
नोट- यह आपार हर्ष का विषय है कि, हमने अपने पूर्व सूचना के मुताबिक त्राटक ज्ञान के साथ सम्मोहन, वशीकरण, कुंडलिनी जागरण का ३३ दिनों का विशेष  कोर्स जारी कर दिया है। इस दुर्लभ त्राटक सम्मोहन कोर्स को अनेक प्रांतों के भाई बंधु और शुभचिंतक लगन पूर्वक कर रहे हैं। अतः मंगल कामना हैं इनकी सफलता के लिए तथा आपके लिए हार्दिक कामना है आपके आगमन के लिए। क्योंकि आप दुनिया से बहुत कुछ हासिल कर सकते हैं परन्तु ऐसा अद्भुत और दुर्लभ ज्ञान कहीं और से प्राप्त करना बहुत ही कठिन है। नामुमकिन भी मान लीजिये। इस सम्बन्ध में किसी भी जानकारी के लिएआप बेहिचक हमें फोन कर सकते हैं। आपको हमारा भरपूर सहयोग प्राप्त होगा, भरोसा रखें।    
                                                          


           

Tuesday, 2 July 2013

स्वर्ण निर्माण



       सोना बनाएं मौज मनाएं 

                (असंभव कहीं कुछ नही)


          जीवन में समस्याओं की कमी नहीं है। किन्तु समस्याओं से मुक्ति का समाधान भी ईश्वर ने सभी मनुष्यों को दे रखी है। वैसे देखा जाये तो आज के युग में समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए धन की सख्त आवश्यकता है। कदम-कदम पर बात-बात में धन की जरुरत, धन का आभाव ही समस्याओं का प्रमुख कारण है।

          अतः यह जीवन धन से लबालब होना अनिवार्य है। इसके लिए महाप्रयत्न करना पड़ता है। विभिन्न स्थितियों से गुजरना पड़ता है। बुद्धि का प्रयोग करते हुए अथक मेहनत करने पड़ते हैं। फिर भी 99% खोदा पहाड़ निकली चुहिया जैसी बात होती है। होना तो यह चाहिए कि कुछ ऐसा करिश्मा हो ताकि  जो देखे सन्न रह जाए,  देखे और  सोंचता रह जाय। अर्थात आपको लक्ष्मी का प्रत्यक्ष आशीर्वाद प्राप्त हो जाय।

          लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए ग्रंथों में अनेकों विधियां और कई-कई उपाय दिए गए हैं। वो सभी अपने आपमें सही और श्रेष्ठ है। किन्तु मैं यहाँ स्वर्ण निर्माण पर एक छोटी सी चर्चा कर रहा हूँ। क्योंकि जीवन में धन की आवश्यकता है। और थोड़े-मोड़े रूपए से कुछ नहीं होने वाला, आज बड़े शहरों में, बड़े लोगों में लाख रूपए की कोई अहमियत नहीं है। हाँ, करोड़पत्तिओं की थोड़ी इज्जत जरुर है। फिर इधर कोई कितना प्रयास करेगा धन प्राप्ति और धन संचय के लिए। इसके लिए तो लक्ष्मी और कुबेर का आशीर्वाद ही आपकी मनोकामना पूरी कर सकता है। 

          और मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ। आपको शीघ्र ही भगवती लक्ष्मी और कुबेर जी का आशीर्वाद प्राप्त होने वाला है। क्योंकि आपको अपने क्षेत्र  का विशिष्ट व्यक्ति बनना है। किन्तु लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए मन साफ़ होना चाहिए, उस मन में अगाध विश्वास होना चाहिए। थोड़ा भी संदेह से समय खो जाता है। कई बार हमारा कुतर्की सोंच भी ऐसे समय से हाथ धो बैठता है। वैसे भी आदमी जब अपने जीवन में काफी तरह से असफल हुआ रहता है तो उसका भगवान पर से भी भरोसा उठ जाता है। 

          जबकि यह तर्क संगति बिलकुल नहीं है। लोग किस्मत और भगवान की बात करते हैं। मैं कर्म और सद्द्विचार की बात करता हूँ। इसी कारण किस्मत के भरोसे जीने वाले लोगों से मेरी कोई दिलचस्पी नहीं होती। यदि आपमें अच्छी सोंच है, बड़े सपने हैं और जीवन में कुछ कर दिखाने के जज्बे और इक्छा शक्ति है, दुनिया भर में लोगों को चैलेन्ज ठोंकना है तो वे लोग ही हमारे ब्लॉग को पढ़े और साफ़ ह्रदय होकर निरंतर संपर्क में बने रहें। हमारा फोन न. आपको उपहार तुल्य है। आप कभी भी संपर्क स्थापित कर सकते हैं।    
       क्योंकि अब रोना धोना नहीं है, अब सही ढंग से कुछ कर दिखाना है। यह मेरी ओर से विश्वसनीय दावा है आपको। लक्ष्मी का आशीर्वाद पाने, जीवन को सफल सुखद बनाने का मार्ग दिखाते हुए मेरा पूरा-पूरा सहयोग आपको मिलता रहेगा निश्चिन्त रहिए। (इस ब्लॉग से पूर्व हमने एक ब्लॉग पोस्ट किया है सोना बनाने का रहस्य) उसे पढ़ लें। मेरे शोध में कई और प्रकार की व्यवस्थाएं है। धनप्राप्ति या लक्ष्मी आगमन के लिए अनेक उपक्रम हैं जो काफी सहज सुगम और सुखद होगा।

नोट- यह आपार हर्ष का विषय है कि, हमने अपने पूर्व सूचना के मुताबिक त्राटक ज्ञान के साथ सम्मोहन, वशीकरण, कुंडलिनी जागरण का 30 से 45 दिनों का विशेष कोर्स जारी कर दिया है। इस दुर्लभ त्राटक सम्मोहन कोर्स को अनेक प्रांतों के भाई बंधु और शुभचिंतक लगन पूर्वक कर रहे हैं। अतः मंगल कामना हैं इनकी सफलता के लिए तथा आपके लिए हार्दिक कामना है आपके आगमन के लिए। क्योंकि आप दुनिया से बहुत कुछ हासिल कर सकते हैं परन्तु ऐसा अद्भुत और दुर्लभ ज्ञान कहीं और से प्राप्त करना बहुत ही कठिन है। नामुमकिन भी मान लीजिये। इस सम्बन्ध में किसी भी जानकारी के लिएआप बेहिचक हमें फोन कर सकते हैं। आपको हमारा भरपूर सहयोग प्राप्त होगा, भरोसा रखें।    
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मेरे कुछ दुर्लभ आगामी ब्लोग्स जो पोस्ट होने वाले है, उनके शीर्षक हैं।
१- घर बैठे सम्मोहन सीखें।
२- वास्तु दोष मुक्ति संभव।
३- तरक्की का तरीका।
४- लड़कियों का सुरक्षा कवच।
५- महिलाओं को पति वशीकरण का वरदान।
६ सम्मोहन तिलक का अदभुत रहस्य।
७- फोटो सम्मोहन की सहज विधि।
८- असाध्य विमारियों का रामवाण इलाज।
९- राजनितिक सफलता यूँ पाई जाती है।
१०- स्वप्न विज्ञान दिलचस्प ज्ञान।  
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                                                       Rishikesh, Delhi, Mau, Ballia 

Monday, 1 July 2013

आज्ञाचक्र यूँ जागृत होता है



       आज्ञा चक्र से भुत भविष्य का ज्ञान

           (जीवन को सौन्दर्यवान बनाएं)

          मनुष्य का शरीर शक्तियों का गोदाम है। अनगिनत पावर  प्लांट है इसमें। इस पावर प्लांट या पावर हॉउस को समझना बहुत जरुरी है ताकि इसका भरपूर लाभ उठाया जा सके। यूँ तो पूरे शरीर में जितनी कुंडलिनी चक्र है उनमें आज्ञा चक्र भी एक नाम आता है। यह चक्र मस्तक के बीच दोनों भौहों के मध्य में विराजमान है, जहाँ सब लोग बिंदी या तिलक लगाया करते हैं।
         
          आज्ञा चक्र के साधक सदा निरोग, सम्मोहक और त्रिकालदर्शी माने जाते हैं। कुंडलिनी के इसी आज्ञा चक्र को योग साधनाओं दवारा जागृत करके किसी भी स्त्री /पुरुष का भुत भविष्य देखा जा सकता है। वर्तमान/तत्काल वह क्या सोंच रहा है यह आसानी से पता लगाया जा सकता है। चुकि पुरे शरीर में स्थित, लौह तत्व की अधिकांश मात्र आज्ञा चक्र पर ही स्थित होता है इस कारण चुम्बकीय प्रभाव भी यही पर होता है।  
          
          अतः जब इस चक्र का जब हम ध्यान करते हैं तो हमारे शरीर में एक विशेष चुम्बकीय उर्जा का निर्माण होने लगता है उस उर्जा से हमारे अन्दर के दुर्गुण ख़त्म होकर, आपार एकाग्रता की प्राप्ति होने लगती है। विचारों में दृढ़ता और दृष्टि में चमक पैदा होने लगता है। तत्पश्चात जब कहीं भी अपनी दृष्टि जाती है तो वहां के बारे में या उसके बारे में अंतर्रुपी ढंग से ज्ञान-अनुभव होने लगता है कि, सच्चाई क्या है। आज के युग में तो ऐसी साधना हर किसी को करनी ही चाहिए ताकि सामने वाले पुरुष या स्त्री के मन में क्या है बिना बताये पता लग जाय. 

          आपके प्रति उसके अन्दर कैसी भावना है। वह आपके लिए नुकसानदायक है या फायदेमंद। ये सब कुछ जानकारी मिल जाती है और यह जीवन की बहुत बड़ी उपलब्धि होगी जब आप अपने आज्ञाचक्र को जागृत करने का प्रयत्न करेंगे। सौभाग्य से आपकी आज्ञाचक्र जागृत हो जाता है तो दुनिया में आपके लिए कुछ भी असंभव नहीं रह जाएगा, यह हमारा दावा है। यदि थोड़ा भी जागृत हुआ तो बेशक आपके लिए वह धारदार शस्त्र का काम करेगा तथा समाज कल्याण के लिए बहुत कुछ कर सकेंगे आप। 

          क्योंकि ……. ..............इसके जागरण से पूरा शरीर सम्मोहन की उर्जा से आप्लावित हो जाता है जिससे किसी विमार व्यक्ति को स्पर्श करके ही रोग मुक्त कर सकते हैं। किसी अपराधी प्रवृति के युवक या युवती की गलत सोंच को ख़त्म कर उसे सही राह पर लाया जा सकता है। रात दिन तनाव में रहने वाले व्यक्ति को माइण्ड फ्री और फ्रेस बनाया जा सकता है। किसी की उलझी हुई गुथियों को सुलझाया जा सकता है। नशा पान करने वालों को पूर्ण स्वस्थ किया जा सकता है। 

          अतःआज्ञा चक्र जागृत कर एक अच्छा भविष्यवक्ता बना जा सकता है। समाज में अलग स्टेट्स बन सकते हैं। क्योंकि एकाग्रता आपके अन्दर भ्रमण करती रहती है। आज्ञाचक्र जागृत करने के लिए बहुत कठिन युक्ति  भी नहीं है। आइए आज्ञाचक्र को जागृत करने के कुछ उपाय पर चर्चा करते हैं। 

आज्ञाचक्र चर्चा- 

.          किसी शांत एकांत कमरे या स्थान पर पालथी मारकर बैठ जाएं। मेरुदंड सीधा रखें, झुके नहीं। दोनों आँखे बंद कर लें। अपने मस्तक के मध्य दोनों भौहों के मध्य में ध्यान से देखने का प्रयास करें। जब आप ऐसा करेंगे तो थोड़ा कष्ट होगा परन्तु अभ्यास बनाए रखेंगे तो आगे सरल सहज लगेगा। जब आप आँखे बंद कर चक्र का ध्यान करते हैं तो वहाँ घोर अँधेरा दीखता है। जैसे ब्रह्माण्ड में चारो तरफ अँधेरा ही अँधेरा व्याप्त हो। किन्तु उस घोर अँधेरे में भी एक काली सी तिल चलती भागती दिखाई देती रहती है। 

          अपने ध्यान के उस क्षण (समय) में उस काली तिल को अपने आज्ञाचक्र के पॉइंट पर ही स्थापित करने का प्रयत्न करें। नित्य अभ्यास करेंगे तो आपको शीघ्र सफलता प्राप्त होने लगेगी। जैसे ही वह काली तिल चक्र पॉइंट पर स्थापित होने लगेगी तभी से वहां का अँधेरा भी छटने लगेगा और जैसे-जैसे उजाले में वृद्धि होगी वैसे वैसे आज्ञाचक्र जागृत होता चला जाएगा। यह एक गुढ़ विद्दा है। गुढ़ रहस्य है। किन्तु आप इसको समझ लेते हैं, और अभ्यास जारी रखते हैं तो मेरा दावा है आप समाज के विशिष्ट हस्ती बन सकते हैं।

          यदि आप इस सम्बन्ध में रूचि रखते हैं तो हमसे विचार विमर्श कर सकते हैं।  आपको हमारा मार्गदर्शन सहयोग निश्चित रूप से प्राप्त होगा।  
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नोट- यह आपार हर्ष का विषय है कि, हमने अपने पूर्व सूचना के मुताबिक त्राटक ज्ञान के साथ सम्मोहन, वशीकरण, कुंडलिनी जागरण का 30 से 45 दिनों का विशेष कोर्स जारी कर दिया है। इस दुर्लभ त्राटक सम्मोहन कोर्स को अनेक प्रांतों के भाई बंधु और शुभचिंतक लगन पूर्वक कर रहे हैं। अतः मंगल कामना हैं इनकी सफलता के लिए तथा आपके लिए हार्दिक कामना है आपके आगमन के लिए। क्योंकि आप दुनिया से बहुत कुछ हासिल कर सकते हैं परन्तु ऐसा अद्भुत और दुर्लभ ज्ञान कहीं और से प्राप्त करना बहुत ही कठिन है। नामुमकिन भी मान लीजिये। इस सम्बन्ध में किसी भी जानकारी के लिएआप बेहिचक हमें फोन कर सकते हैं। आपको हमारा भरपूर सहयोग प्राप्त होगा, भरोसा रखें।    
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                                                        अशोक भैया 
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