Monday, 18 November 2013

त्राटक के अद्भुत रहस्य


              आज्ञा चक्र से 
          भूत भविष्य का ज्ञान

                (जीवन को सौन्दर्यवान बनाएं)

          मनुष्य का शरीर शक्तियों का गोदाम है। अनगिनत पावर  प्लांट है इसमें। इस पावर प्लांट या पावर हॉउस को समझना बहुत जरुरी है ताकि इसका भरपूर लाभ उठाया जा सके। यूँ तो पूरे शरीर में जितनी कुंडलिनी चक्र है उनमें आज्ञा चक्र भी एक नाम आता है। यह चक्र मस्तक पर दोनों भौहों के मध्य में विद्द्यमान है, जहाँ लोग बिंदी या तिलक लगाया करते हैं।
         
          आज्ञा चक्र के साधक सदा निरोग, सम्मोहक और त्रिकालदर्शी माने जाते हैं। कुंडलिनी के इसी आज्ञा चक्र को योग साधनाओं दवारा जागृत करके किसी भी स्त्री /पुरुष का भूत भविष्य देखा जा सकता है। वर्तमान/तत्काल वह क्या सोंच रहा है यह आसानी से पता लगाया जा सकता है। चुकि पूरे शरीर में स्थित, लौह तत्व की अधिकांश मात्र आज्ञा चक्र पर ही स्थित होता है इस कारण चुम्बकीय प्रभाव भी यही पर होता है।  
          
          अतः जब इस चक्र का हम ध्यान करते हैं तो हमारे शरीर में एक विशेष चुम्बकीय उर्जा का निर्माण होने लगता है उस उर्जा से हमारे अन्दर के दुर्गुण ख़त्म होकर, आपार एकाग्रता की प्राप्ति होने लगती है। विचारों में दृढ़ता और दृष्टि में चमक पैदा होने लगती है। तत्पश्चात जब कहीं भी अपनी दृष्टि जाती है तो वहां के बारे में या उसके व्यक्तित्व के बारे में अंतर्रुपी ढंग से ज्ञान-अनुभव होने लगता है कि, सच्चाई क्या है। आज के युग में तो ऐसी साधना हर किसी को करनी ही चाहिए ताकि सामने वाले पुरुष या स्त्री के मन में क्या है बिना बताये पता लग जाय।  

          आपके प्रति उसके अन्दर कैसी भावना है। वह आपके लिए नुकसानदायक है या फायदेमंद। ये सब कुछ जानकारी मिल जाती है और यह जीवन की बहुत बड़ी उपलब्धि होगी जब आप अपने आज्ञाचक्र को जागृत करने का प्रयत्न करेंगे। सौभाग्य से आपकी आज्ञाचक्र जागृत हो जाता है तो दुनिया में आपके लिए कुछ भी असंभव नहीं रह जाएगा, यह हमारा दावा है। यदि थोड़ा भी जागृत हुआ तो बेशक आपके लिए वह धारदार शस्त्र का काम करेगा तथा समाज कल्याण के लिए बहुत कुछ कर सकेंगे आप।

          यही नहीं आप आज्ञा चक्र को जागृत करके सम्मोहन वशीकरण में भी अद्भुत लाभ प्राप्त को भी अपने वश में कर सकते है। बिमारियों से मुक्त बन सकते है। ज्ञान के क्षेत्र में शोहरत पूर्ण आगे जा सकते है। अर्थात जिंदगी में कुछ भी कर सकते है। आज्ञा चक्र जागृत करना बहुत मुश्किल नहीं है। इसके लिए विशेष नियम विधि से त्राटक का अभ्यास करना होता है। सही विधि उसे कहते है, जिसके द्वारा आपको सफलता पर सफलता मिलती चली जाये। वरना अशुद्ध और अपूर्ण विधि से आँखें नुकसान भी उठाती  है।  इसी कारण ऐसा त्राटक ज्ञान किसी अनुभवी के मार्गदर्शन में ही करना उचित होता है। 

          क्योंकि ……. ..............इसके जागरण से पूरा शरीर सम्मोहन की उर्जा से आप्लावित हो जाता है जिससे किसी विमार व्यक्ति को स्पर्श करके ही रोग मुक्त कर सकते हैं। किसी अपराधी प्रवृति के युवक या युवती की गलत सोंच को ख़त्म कर उसे सही राह पर लाया जा सकता है। रात दिन तनाव में रहने वाले व्यक्ति को माइण्ड फ्री और फ्रेस बनाया जा सकता है। किसी की उलझी हुई गुथियों को सुलझाया जा सकता है। नशा पान करने वालों को पूर्ण स्वस्थ किया जा सकता है। 

          अतःआज्ञा चक्र जागृत कर एक अच्छा भविष्यवक्ता बना जा सकता है। समाज में अलग स्टेट्स बन सकते हैं। क्योंकि एकाग्रता आपके अन्दर भ्रमण करती रहती है। आज्ञाचक्र जागृत करने के लिए बहुत कठिन युक्ति  भी नहीं है। आइए आज्ञाचक्र को जागृत करने के कुछ उपाय पर चर्चा करते हैं। 

आज्ञाचक्र चर्चा- 

.          किसी शांत एकांत कमरे या स्थान पर पालथी मारकर बैठ जाएं। मेरुदंड सीधा रखें, झुके नहीं। दोनों आँखे बंद कर लें। अपने मस्तक के मध्य दोनों भौहों के मध्य में ध्यान से देखने का प्रयास करें। जब आप ऐसा करेंगे तो थोड़ा कष्ट होगा परन्तु अभ्यास बनाए रखेंगे तो आगे सरल सहज लगेगा। जब आप आँखे बंद कर चक्र का ध्यान करते हैं तो वहाँ घोर अँधेरा दीखता है। जैसे ब्रह्माण्ड में चारो तरफ अँधेरा ही अँधेरा व्याप्त हो। किन्तु उस घोर अँधेरे में भी एक काली सी तिल चलती भागती दिखाई देती रहती है। 
          अपने ध्यान के उस क्षण (समय) में उस काली तिल को अपने आज्ञाचक्र के पॉइंट पर ही स्थापित करने का प्रयत्न करें। नित्य अभ्यास करेंगे तो आपको शीघ्र सफलता प्राप्त होने लगेगी। जैसे ही वह काली तिल चक्र पॉइंट पर स्थापित होने लगेगी तभी से वहां का अँधेरा भी छटने लगेगा और जैसे-जैसे उजाले में वृद्धि होगी वैसे वैसे आज्ञाचक्र जागृत होता चला जाएगा। यह एक गुढ़ विद्दा है। गुढ़ रहस्य है। किन्तु आप इसको समझ लेते हैं, और अभ्यास जारी रखते हैं तो मेरा दावा है आप समाज के विशिष्ट हस्ती बन सकते हैं।

            आज्ञाचक्र जागरण की अन्य विधियाँ भी है जिससे शीघ्र सफलता प्राप्त की जा सकती है। इसमें क्रिस्टल बाल, महाशाक्तिचक्र और आज्ञाचक्र यन्त्र  के माध्यम से यह अभ्यास आसान हो जाता है। परन्तु इसके निरंतर अभ्यास से ही पूर्णता संभव होती है। यदि आप इस सम्बन्ध में रूचि रखते हैं तो हमसे विचार विमर्श कर सकते हैं।  आपको हमारा मार्गदर्शन सहयोग निश्चित रूप से प्राप्त होगा।    

इसे अवश्य पढ़ें-

सभी भाई  बहन और शुभचिंतकों के लिए यह आपार हर्ष का विषय है कि, हमने अपने पूर्व सूचना के मुताबिक त्राटक ज्ञान के साथ सम्मोहन, वशीकरण, कुंडलिनी जागरण का 30 से 45 दिनों का विशेष  कोर्स जारी कर दिया है। इस दुर्लभ त्राटक सम्मोहन कोर्स को अनेक प्रांतों के भाई बंधु और शुभचिंतक लगन पूर्वक कर रहे हैं। अतः मंगल कामना हैं इनकी सफलता के लिए तथा आपके लिए हार्दिक कामना है आपके आगमन के लिए। क्योंकि आप दुनिया से बहुत कुछ हासिल कर सकते हैं परन्तु ऐसा अद्भुत और दुर्लभ ज्ञान कहीं और से प्राप्त करना बहुत ही कठिन है। नामुमकिन भी मान लीजिये। इस सम्बन्ध में किसी भी जानकारी के लिएआप बेहिचक हमें फोन कर सकते हैं। आपको हमारा भरपूर सहयोग प्राप्त होगा, भरोसा रखें।    
                                                                                    - धन्यवाद ! 
                                           हमारा जीमेल एड्रेस ashokbhaiya666@gmail.com
अतः आप दुनिया को हैरत में डालने वाला सम्मोहन शिक्षा प्राप्त करना चाह्ते हैं तो हमारे नम्बर पर फ़ोन कर सकते हैं.   - अशोक भैया, 9565120423 गोरखपुर, ऋषिकेश, हरिद्वार, दिल्ली,
आप हमारे फेसबुक पेज से जुड़कर अपनी समस्याओं के समाधान और अन्यानेक लाभ उठायें. इसके लिए फेसबुक मेंashokbhaiya666@gmail.com टाइप करें.
                                                                                   अशोक भैया - 9565120423 
   किसी भी जानकारी के लिए फोन कर सकते हैं - धन्यवाद।  

7 comments:

  1. This comment has been removed by a blog administrator.

    ReplyDelete
  2. ३ दिनों का विशेष  कोर्स कितने का है

    ReplyDelete
    Replies
    1. इसका घर बैठे कोर्स होता है. इस कोर्स में सम्मोहन, वशीकरण, कुंडलिनी जागरण और टेलीपैथी का ज्ञान मार्गदर्शन दिया जाता है. आप हमारे फेसबुक पेज से जुड़कर लाभ उठाइये या अन्य जानकारी के लिए हमें फोन कर लीजिये. 9565120423

      Delete
  3. जानकारी अच्छी है
    मेरे गुरु जी ने मुझे अष्टाङ्ग योग सिखाया था जब मै 11 साल का था लकिन उस टाइम मेरे आज्ञा चक्र से प्रकाश निकलने लगा था लकिन तब मई छोटा थाऔर इन सब बातो को नही जनता था लकिन अब अभ्यास का टाइम नही मिलता है और कोई सही दिशा निर्देशन करता है
    मेरा मोबाईल न है8090204849
    यदि कोई मुझे निर्देशन दे सकता हो तो हम उष्का स्वागत दिल से करते है लकिन वही व्यक्ति मेरा निर्देशन करे जो सच्चा देश भक्त हो।
    जय हिन्द।।

    ReplyDelete
  4. This comment has been removed by a blog administrator.

    ReplyDelete
  5. This comment has been removed by a blog administrator.

    ReplyDelete