Sunday, 25 August 2013

सत्य की सुगंध



                            सत्य  की सुगंध

             (एक सुखद अनहोनी घटना)

          बहुत साल पहले पढाई के समय में ही मैं जिज्ञासु किस्म का रहा। भिन्न-भिन्न ज्ञान-विज्ञान में मेरी रूचि हुआ करती। मैंने सुना था, समुद्र में कोई ऐसी मछली होती है जो अपने शरीर में बिजली उत्पन्न कर लिया करती। मैं उस मछली की जानकारी तलाशना शुरू कर दिया। ढेर सारी किताबें खरीदकर पढा, बहुतों से उस मछली के बारे में जानकारी लेना चाहा किन्तु सही जानकारी का बिलकुल ही अभाव रहा। फिर मैं कोलकत्ता नेशनल लायब्रेरी का सदस्य बनकर वहां से डाक के जरिये किताबें मंगाकर पढ़ता रहा, पर बात वहीँ की वहीँ रुकी रही।  

          हाँ एक बात जरुर हुआ  इसी सिलसिले में मैं जोधपुर (राजस्थान) स्थित पूज्य गुरुदेव डॉ नारायणदत श्रीमाली जी और वहां से प्रकाशित पत्रिका तंत्र मंत्र यन्त्र विज्ञान से परिचित हुआ। पत्रिका पढ़कर अच्छा लगा, साथ ही मेरा मकसद कामयाब होता नजर आने लगा। आगे चलकर पत्रिका का नियमित सदस्य बनना पड़ा क्योंकि अब यूँ लग रहा था, मानो मैं किसी मैग्नेटिक दुनिया में प्रवेश करता जा रहा हूँ। वह पत्रिका पढ़कर ही लग गया कि अब मछली मिले न मिले एक सक्षम सामर्थ्य गुरुदेव मिल गए है तो मैं भी वो विद्युत् उत्पन्न कर ही सकता हूँ। 

          मैं लगातार संपर्क में रहा घर बैठे कई प्रकार के योग साधना और प्रयोग भी किये जिससे मेरे आत्मविश्वास और इक्षाशक्ति को वृद्धि और विस्तार होने में बहुत मदद मिली। मगर तब तक गुरुदेव से प्रत्यक्ष मिलने और उनसे कुछ हासिल करने की आरजू बहुत ही तेज हो चली थी। जोधपुर का कई प्रोग्राम बनाया और फेल होता गया। कभी मन में कोई संदेह घर कर जाता तो कभी व्यवस्था शून्य हो जाता। किन्तु एक रात मैं विस्तर पे था। जोधपुर आश्रम के बारे में ही सोंच रहा था ........तो लगा इस तरह तो सोंचता ही रह जाऊंगा। उस रात दृढ निश्चय किया और अगली सुबह निकल गया गुरुआश्रम के लिए जोधपुर।  

          मैं दिल्ली गया और दिल्ली से जोधपुर। उन दिनों छोटी लाइन ही थी। बहरहाल मैं आश्रम पहुँच गया। और नजारा देखा तो बड़ा ही अफसोस हुआ अपने आप पर कि, मैंने इतना विलम्ब क्यों किया यहाँ आने में। यहाँ तो सब कुछ संभव है। उस समय वहां कोई महोत्सव था। इसलिए उस शिविर आयोजन में देश और विदेश से तमाम शिष्यों का आगमन जारी था। मेरे लिए तो वह सब कुछ नया और अनहोनी घटना की तरह ही था। चारों तरफ उमंग, हर तरफ उत्साह। दृश्य देखकर मैं अपना सब कुछ भूल चूका था। मैं  कौन  हूँ, कहा से आया हूँ। बस ये मालूम था कि मैं गुरुदेव से मिलने आया हूँ, कुछ हासिल करने आया हूँ।  

          संदेह ऐसी चीज है जो अक्सर ही सौभाग्य पर ग्रहण लगा देती है। क्योंकि  हर आदमी हर बात ठोक बजाकर देख लेना चाहता है। जिसे (आज) मैं उचित नहीं मानता। कभी रिश्क भी उठाये जाते है। विश्वास भी किया जाता है। उस वक्त मैं स्वयं बार-बार अपने आप पर खीज रहा था कि, इतने साल से मैं संदेह लिए सोंचता रहा, वहां क्या होगा, कैसा होगा आदि आदि। खैर वहां मेला सा प्रतीत हो रहा था। साधना प्रवचन जारी था।  मैंने स्टाल से गुरुदेव के बहुत सारे बुक्स ख़रीदे। आडिओ कैसेट और भी कुछ सामग्रियां खरीदी। स्थिति तो ऐसी थी कि हर कोई वहा का सब कुछ ले लेना चाहता था क्योंकि हर चीज दुर्लभ और अनोखा था। 

          शिविर में गुरुदेव प्रवचन के माध्यम से लक्ष्मी साधना, सरस्वती साधना, सम्मोहन साधना, वशीकरण साधना, कुंडलिनी जागरण आदि के बारे में बारीकी से बताते फिर अपने सानिध्य में प्रत्यक्ष साधना कराते। गुरु दिक्षा के साथ-साथ अन्यानेक दुर्लभ दिक्षा भी प्रदान किया जाता। मैं अपना सौभाग्य मानते हुए कार्यक्रमों में भाग लेता रहा फिर घर आकर उसके निरंतर अभ्यास में लग जाता। उन्होंने ही बताया था कि, सम्मोहन वशीकरण शरीर और मन का विज्ञान है। इस रहस्य को हर किसी को जानना चाहिए और जब भी, जहाँ भी अवसर मिले तो किसी के सही मार्गदर्शन में इस ज्ञान को प्राप्त कर लेना चाहिए। 

             सम्मोहन विज्ञान तो दुनिया का एक ऐसा विषय है जिसके दवारा कठिन से कठिन कार्य संपन्न  किये जा सकते हैं। अपने शरीर में विद्युत् यानि घोर आकर्षण तरंग एकत्रित किया जा सकता है और किसी भी प्राणी को उस प्रभाव से आकर्षित कर उसे स्तब्ध किया जा सकता है। समाज में लोकप्रिय बना जा सकता है। असाध्य बीमारियों का उपचार किया जा सकता है। गलत पथ पर जा रहे लोगों को सुधारा जा सकता है। पारिवारिक तनाव ख़त्म किया जा सकता है। नाराज चल रहे प्रेमी या किसी व्यक्ति को अपने अनुकूल बनाया जा सकता है। दूसरों के मन की बात पता किया जा सकता है। कुंडलिनी जागरण में सहयोग पाया जा सकता है। यादाश्त काफी तेज किया जा सकता है इत्यादि।

          सभी प्रकार की समस्याओं का समाधान किया जा सकता है। सम्मोहन की शिक्षा दीक्षा  से समाज में श्रेष्ठ व्यक्ति बना जा सकता है और यह लाभ समान रूप से स्त्री पुरुष कोई भी प्राप्त कर सकता है। आज यह महासौभाग्य की बात है कि, मैं अपने अनुभव की बात बता रहा हूँ तथा सम्मोहन विज्ञान को सिखने समझने का अवसर भी दे रहा हूँ क्योंकि किसी भी ज्ञान का सही प्रकार से विस्तार होना चाहिए ताकि उसका लाभ साधारण व्यक्ति भी आसानी से उठाये। सम्मोहन विज्ञान पर कई प्रामाणिक लेख मैंने इससे पहले भी दिया है। इसे सिखने समझने की आसान विधि और उपाय भी दिया गया है।

          आज वे सभी भाई बन्धु और शुभचिंतक सौभाग्यशाली हैं जो संदेह से परे हटकर सम्मोहन अभ्यास आरम्भ कर चुके हैं और लगातार हमारे संपर्क में रहते हुए सफलता के पथ पर है। उनके नाम पत्ते फोन नंबर शीघ्र ही प्रकाशित किये जायेंगे क्योंकि कुछ लोग आज भी संदेह की गिरफ्त में हैं कि, ऐसा संभव नहीं जबकि सम्मोहन विज्ञान ही ऐसा शस्त्र और शास्त्र है जहाँ कुछ भी असंभव नहीं। 24-25 वर्ष पहले मैं भी ऐसा ही समझता था। आज मुझे पढ़कर अंदाजा लगाया जा सकता है कि सम्मोहन शास्त्र किसे कहते हैं। मैं अब भी कह रहा हूँ, आप जहाँ भी रहिये, अपनी समस्याएँ मुझे फोन, या नेट मैसेज से बताइए। मेरा पूरा प्रयत्न होगा आपकी समस्या का समाधान दूँ। किन्तु मेरी राय है, सोंच ऐसा बनाइये ताकि समस्याओं के समाधान आप खुद कर सके। यह मेरे लिए भी गर्व की बात होगी। 

          सम्मोहन विज्ञान एक ज्ञान है इसे सिखने सिखाने में किसी प्रकार का कोई शुल्क नहीं होना चाहिए। किन्तु दूसरे पक्ष से देखा जाय तो ऐसा दुर्लभ ज्ञान महाज्ञान तो अपना सब कुछ न्योछावर करके भी प्राप्त कर लेना चाहिए। सम्मोहन विज्ञान मात्र  किसी आकर्षण का विषय नहीं है। यह तो मानव तन में प्रारंभ से स्थित चुम्बकीय तरंगों का ज्ञान है। यह तरंगें सुप्त अवस्था में होती हैं जिसे अज्ञानता वश हम उसे नजरंदाज करते रहते हैं। इसके अभ्यास पूर्णता के बाद व्यक्ति, सामान्य व्यक्ति न होकर अपने क्षेत्र का प्रभावशाली व्यक्तित्व बन चुका होता है। अतः सम्मोहन अभ्यास सामग्री पैकेट प्राप्त करने के लिए आप फोन से संपर्क कर लें।   फोन न. 9565120423 (दिल्ली-ऋषिकेश) 

नोट- यह आपार हर्ष का विषय है कि, हमने अपने पूर्व सूचना के मुताबिक त्राटक ज्ञान के साथ सम्मोहन, वशीकरण, कुंडलिनी जागरण का 30 से 45 दिनों का विशेष कोर्स जारी कर दिया है। इस दुर्लभ त्राटक सम्मोहन कोर्स को अनेक प्रांतों के भाई बंधु और शुभचिंतक लगन पूर्वक कर रहे हैं। अतः मंगल कामना हैं इनकी सफलता के लिए तथा आपके लिए हार्दिक कामना है आपके आगमन के लिए। क्योंकि आप दुनिया से बहुत कुछ हासिल कर सकते हैं परन्तु ऐसा अद्भुत और दुर्लभ ज्ञान कहीं और से प्राप्त करना बहुत ही कठिन है। नामुमकिन भी मान लीजिये। इस सम्बन्ध में किसी भी जानकारी के लिएआप बेहिचक हमें फोन कर सकते हैं। आपको हमारा भरपूर सहयोग प्राप्त होगा, भरोसा रखें।   
                                                            हमारा जीमेल एड्रेस ashokbhaiya666@gmail.com

जो लोग अभ्यास आरम्भ कर रहे हैं या कर चुके हैं, वे अपना अनुभव या समस्याएं हमें निःसंकोच बताते रहें। आवश्यक होने पर सलाह भी लेते रहें। सम्मोहन अभ्यास में त्राटक का सर्वाधिक महत्व है और त्राटक नेत्रों के माध्यम से ही किया जाता है। अभ्यासकाल में नेत्रों को किसी प्रकार का कोई नुकसान न हो इस कारण मार्गदर्शन अनिवार्य होता है। आप इसमें पूर्ण सफल हों।  
                                                               मंगल कामनाओं के साथ ! - अशोक भैया 
                                                                            9565120423 (दिल्ली-ऋषिकेश ) 
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अतः आप दुनिया को हैरत में डालने वाला सम्मोहन शिक्षा प्राप्त करना चाह्ते हैं तो हमारे नम्बर पर फ़ोन कर सकते हैं.9565120423 - अशोक भैया, गोरखपुर, ऋषिकेश, हरिद्वार, दिल्ली, इसी के साथ - मंगल कामनाओं सहित- अशोक भैया 
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