Saturday, 29 June 2013

अब आप भी सोना बना सकते है

         
         सोना बनाने का रहस्य 


          यह सौभाग्य की बात है कि  आज नेट सुविधा के कारण  आपको सोना बनाने की अद्भुत जानकारी बहुत ही सहज रूप से दे रहा हूँ। इसके अनुसार कोई भी व्यक्ति विभिन्न सामग्री  इकट्ठी करके अपने आत्मविश्वाश के योगदान से अपनी हाथों से सोने का निर्माण कर सकता है। क्योंकि दुनिया में कुछ भी असंभव नहीं है। असंभव उनके लिए है जो हाथ पर हाथ धरे बैठे रहते है, उनके लिए है जो ख्याली पुलाव बनाते रहते है। किन्तु आज मैं स्वर्ण निर्माण की चर्चा कर ही रहा हूँ।    
          
        आप थोड़ा हैरान, थोड़ा आश्चर्य चकित हो सकते हैं। मगर यह हैरान और परेशान होने का विषय बिलकुल ही नहीं है। आज भी कई ऐसे नाम गिनाए जा सकते हैं जो पूर्व काल में स्वर्ण निर्माण के सिद्धहस्त  रहे हैं। तंत्र  मंत्र, सिद्धियों से, पारे से, जड़ी वनस्पत्तियोँ से और रसायनों से सोने का निर्माण करके समाज की आर्थिक व्यवस्था सही कर चुके हैं। इनके नाम इस प्रकार है। प्रभुदेवा जी, व्यलाचार्य जी, इन्द्रधुम जी, रत्न्घोश जी आदि स्वर्ण विज्ञानी के तौर पर प्रसिद्ध रह चुके है। ये अपने आप में पारद सिद्धि पुरुष के रूप में जाने जाते हैं। 
          
          किन्तु एक भारतीय नाम है नागार्जुन की, जिनको समूचा विश्व स्वर्ण विज्ञानी के ही रूप में जानता है। नागार्जुन ने अपने समय में विभिन्न विधिओं से सोने का निर्माण कर पूरी दुनिया को हैरत में डाल दिया। आज भी भारत के सुदूर प्रान्तों में कुछ ज्ञानी जानकार, योगी साधक हो सकते हैं जो सोने का निर्माण करने में सक्षम है, यह तो खोज और शोध की बात है। ऐसे ही नामो में एक प्रसिद्ध नाम है श्री नारायण दत्त श्रीमाली जी, जो 13 जुलाई  सन 1998 ई० को इक्छा मृत्यु प्राप्तकर सिधाश्रम को प्रस्थान कर गए, परन्तु अपने पीछे अनेक दीपक छोड़ गए जो आज समाज कल्याण करने में सक्षम है और गुरु आदेश पर निरंतर कार्यशील हैं।  
          
          जैसाकि विभिन्न विधियों से सोने का निर्माण संभव है तथा पूर्व समय में कई अनुभवी रसाचार्यों ने सोने का निर्माण कर समाज को चकित किया, यह गर्व की ही बात है। 6 नवम्बर सन 1983 साप्ताहिक हिन्दुस्तान के अनुसार सन 1942 में पंजाब के कृष्णपाल शर्मा ने ऋषिकेश में मात्र  45 मिनट में पारा के दवारा दो सौ तोला सोना बनाकर रख दी जो उस समय 75 हजार रूपये में बिका तथा वह धनराशि दान में दे दिया गया। उस समय वहा पर महात्मा गाँधी, उनके सचिव श्री महादेव देसाई, और युगल किशोर बिड़ला आदि उपस्थित थे। इससे पहले 26 मई सन 1940 में भी श्री कृष्णपाल शर्मा ने दिल्ली स्थित बिड़ला हॉउस में पारे को शुद्ध सोने में बदलकर प्रत्यक्ष  दिखा दिया था। उस समय भी वहा विशिष्ट गणमान्य  लोग उपस्थित थे। 
          
           इस घटना का वर्णन बिड़ला मंदिर में लगे शिलालेख से भी मिलता है। इस सिलसिले में नागार्जुन का नाम विख्यात तो है ही, जिन्हें स्वर्ण निर्माण में महारत हासिल थी। उनके लिखे कई महत्वपूर्ण ग्रन्थ मौजूद है। उनका अध्ययन करके साधारण व्यक्ति भी भिन्न-भिन्न विधियों से सोना बनाने की प्रक्रिया समझ सकता है। नागार्जुन की संघर्ष कथा किसी आगामी पोस्ट में जरुर दूंगा। यहाँ मैं स्वर्ण निर्माण की सहज विधि के चर्चे पर आता हूँ। और इस समय मैं सिर्फ एक अत्यंत ही सरल विधि को बता रहा हूँ  यह विधि विश्वसनीय और प्रामाणिक है। इसे त्रिधातु विधि भी कहते हैं। यानी तीन  धातुओं को मिलाकर पहले एक कटोरानुमा बर्तन बनाया जाता है। फिर उसमें शुद्ध पारे सहित भिन्न-भिन्न सामग्री  के सहयोग से स्वर्ण बनाया जाता है। बर्तन की निर्माण विधि इस प्रकार है। 
          
            शुद्ध लोहा 500 ग्राम , शुद्ध पीतल 500 ग्राम और शुद्ध कांसा 500 ग्राम लेकर उसे अलग अलग पिघलाएं। पिघल जाने पर तीनो को मिश्रण करके एक कटोरे या कढाई  का रूप दे दें। ध्यान रहे उस बर्तन में कहीं छेद न हो। तीनो धातु शुद्ध और बराबर मात्रा  में हो। ऐसा बर्तन बनाने में दिक्कत हो तो बनाने वाले से ही बनवाले। बर्तन बन जाने के बाद उसे रख लें और बाजार से किसी विश्वसनीय पंसारी की दुकान से 200 ग्राम गंधक , 200 ग्राम नीला थोथा (तुतिया), 200 ग्राम नमक और 200 कुमकुम (रोली) और रस सिंदूर ख़रीदे। इसी प्रकार विश्वसनीय स्तर पर 100 ग्राम शुद्ध पारा और शहद भी खरीद कर लें। ध्यान रहे, गंधक को सभी लोग जानते हैं। नीला थोथा  जिसे तुतिया भी कहते हैं। यह नीले रंग का होता है, यह पुर्णतः जहर होता है। 
          
            सभी सामग्री इकट्ठी करके गंधक, नीला थोथा, नमक और रोली अलग-अलग कूट पीसकर आपस में मिलादें। अब इसे एक किलो स्वच्छ ताजे पानी में घोल दें। इसके बाद चूल्हा या स्टोव पर आग जलाएं और तीन  धातुओं वाले बने बर्तन में इस घोल को डाले। उसे धीमी आंच पर पकाएं। जब पानी उबलने लगे तो 100 ग्राम पारे को रससिंदूर  में अच्छी तरह से घोटे। पारे का विष निकलकर साफ़ होता जाएगा। उस पारे की गोली बनाएं और उसके ऊपर शहद चिपोड दें। फिर उसे खौलते पानी में सामग्रियों के बीच  धीरे से रख दें।  उसे धीमी आंच पर पकने दें। जब दो तिहाई भाग पानी जल जाए तो पारे के गोले पर ध्यान रखे, वह गोला हल्का हल्का सुनहला होता जाएगा। जब पूरी तरह से सुनहला दिखने लगे तो बर्तन को नीचे  उतार लें। आपके दृढ आत्मविश्वास और परिश्रम से सोने का निर्माण हो चूका रहेगा। अतः उसका श्रद्धा पूर्वक नमन करें।

सावधानी -

1-     नीला थोथा जहर होता है, इसे छूने के बाद हर बार हाथ धो लें। 
2-     गंधक भी कुछ इसी तरह का पदार्थ है। छूने के बाद हाथ धो लें। 
3-     पारा अति चंचल द्रव्य है। इसे जमीं पर गिरने से बचाएं।
4-     सामग्री पकाते समय आँखों को किसी विशेष चश्मे से ढके रखें।

                                                                                                      आपकी सफलता के लिए मंगल कामना !

इस देश का सौभाग्य है कि,  सोना बनाने की यहाँ एक दो नहीं बल्कि संत ऋषियों  की कृपा से अनेक विधिंयां पूर्व संयोजित है। उन विधियों का रहस्य पूरे प्रामाणिकता के साथ आज भी संसार के सम्मुख है। विभिन्न ग्रंथों के अनुसार ऐसे दिव्य ज्ञान प्राप्त होने के बाद भी कोई गरीबी का रोना रोए तो इसे महा दुर्भाग्य ही माना जाएगा।
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32 comments:

  1. अपनी राय जरुर दें।

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    1. ashok g kya aap ne khabi sona banya hai kya ?

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  3. आप फेसबुक पर हमसे डायरेक्ट सवाल करें ताकि उसके उत्तर उससे अनेकों लोग भी लाभान्वित हों. अशोक भैया.

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  6. Vidhi ki Video banakar upload kare.

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  12. bane ga sona par kai baar koshish karne par

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    1. सोना बनाने की कला कोई जनता भी हो तो उसे पोस्ट न करे और न ही किसी को बतलाये , क्युकी इससे देश या धरती आबाद नहीं बल्कि बर्बाद होगा , बिल्कुल हाड्रोजन बम की तरह।

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  20. अशोक जी स्वर्णपात्र नहीं बन पा रहा है लोहा , पीतल और कांसा की कढ़ाई बनाने में दिक्कत है कृपया मार्गदर्शन करें ।।

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    1. पहले लोहा गलाईए, गल जाने के बाद उसमे ताँबा डालिये पुनः गलने के बाद उसमे जस्ता डालिये जब गलके एक हो जाय तो उसे तुरंत अग्नि पर से उतार लीजिये !

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  21. bskwas h ye sab pare SE sona nhi banta Na mumkin h AGR banega to parkarti SE hi or jise parkarti ke bare me acha gyan h vo bana shkta h itna or kah shkta hu me ki AGR kisi insan NE gold bana liya to uski kimat bahut jyada hogii

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  22. bskwas h ye sab pare SE sona nhi banta Na mumkin h AGR banega to parkarti SE hi or jise parkarti ke bare me acha gyan h vo bana shkta h itna or kah shkta hu me ki AGR kisi insan NE gold bana liya to uski kimat bahut jyada hogii

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