Saturday, 14 September 2013

अपनों से अपनी बात



          अपनों से अपनी बात


सम्मोहन, स्वर्णनिर्माण, वास्तु सामग्री चर्चा

मेरे पिछले सभी ब्लॉग को देश के कोने-कोने में पढ़ा और पसंद किया गया। पढ़ने और पसंद करने का क्रम अब भी लगातार जारी है। इस सिलसिले में अनेकों मित्र-शुभचिंतक मिले जो बड़ा ही हिम्मत दिखाते हुए मुझको समझे और मुझपर भरोसा किये। मैंने सोंचा सभी  के नाम दे दूँ मगर रुक गया, क्योंकि मुझे भी परखना है। बहरहाल आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद और आपकी सुखद भविष्य की मंगल कामनाएं। 

कुछ बातें शुरू नहीं की जाती बल्कि हो जाती है। ऐसा तभी होता है जब बात और विषय में दम होता है। इस साईट पर मैने स्वर्ण निर्माण और सम्मोहन शास्त्र पर बिलकुल  प्रेक्टिकल और गोपनीय लेख दिया जिसे नेट सुविधा के चलते अनेकों भाई बहन और शुभचिंतकों ने सराहा तथा मुझसे सहयोग लेते हुए प्रयोग किया। स्वर्ण निर्माण पर जल्द ही कुछ और सहज सुगम लेख देने वाला हूँ। इससे भी हैरत अंगेज जो लेख देने वाला हूँ उसका शीर्षक होगा। पारस पत्थर का निर्माण संभव है। यह आपके लिए अद्भुत और उपयोगी होगा। सम्मोहन विज्ञान में रूचि रखने वाले शुभचिंतकों के लगातार फोन आ रहे हैं। मुझे तो हर्ष हो रहा है कि ऐसे गुमनाम होते विषय को अब बड़ी उत्साह और उमंगों के साथ चर्चा होने लगी है। ऐसा होना आपके उत्तम भविष्य का शुभ संकेत है। मुझे तो आश्चर्य है की बहुतेरे लोग वर्षों से सम्मोहन विज्ञान को समझने की लालसा लिए निराश हो चले थे, आज संपर्क में आने के बाद जैसे उन्हें खजाना मिल गया। 

अब आपको भी इस खजाने तक पहुँच बनानी है। जिन्होंने अपना सौभाग्य सहेज कर रखा था वो हमारे व्यक्तिगत मार्ग निर्देशन में अभ्यासरत होकर प्रगति पथ पर है। मेरा तो ह्रदय से प्रयास है आपको आपकी मंजिल पर पहुचाना। इसलिए एक बार पुनः दुहरा रहा हूँ- कि भरोसा रखिये, मेरा सहयोग आपके जिंदगी को इतना बुलंद कर देगा कि, जो देखेगा - आपको देखता ही रह जायेगा। आप जहाँ भी रहेंगे चर्चा में रहेंगे। आप जो चाहेंगे वैसा ही होगा। यही है सम्मोहन विज्ञान की प्रमुख प्रामाणिक रहस्य और यह साधारण बात या साधारण चर्चा नहीं है। यह जीवन की एक ऐसी चर्चा है जो सर्वथा गोपनीय और दुर्लभ रही है। अवसर को समझिये और अवसर का सम्मान कीजिये। कल दुनिया आपको सलाम ठोकेगी।   

सम्मोहन ज्ञान आज के युग में वरदान है। हमारी सांसे, हमारे कार्य, हमारी सम्पूर्ण गतिविधियाँ सब कुछ इसी के सहारे संचालित है। इसी कारण इसे प्राण विज्ञान भी कह सकते हैं। यदि सम्मोहन विज्ञान के रहस्य को समझते हुए अपनी दिनचर्या आरम्भ किए जाये तो सभी कार्यों में सफलता मिलकर ही रहती है इसमें कोई शक नहीं। किसी को सम्मोहित करने की बात हो या किसी के सम्मुख सम्मोहक दिखने की बात हो। व्यावसायिक समस्या हो या पारिवारिक अशांति की बात हो। जितनी बारीकी से सम्मोहन विज्ञान को समझेंगे उतना ही तरक्की अपनी आँखों से देखेंगे। यह मेरा दावा है आपको कि, यदि आपने इसे समझ लिया तो यकीन मानिए, दुनिया की कोई ताकत आपकी तरक्की रोकने का साहस नहीं करेगी। यह सम्मोहन विज्ञान का स्पष्ट कथन है।  (सम्मोहन विज्ञान पर इससे पूर्व के मेरे ब्लॉग अवश्य देखें)

आगामी ब्लॉग के शीर्षक -
पारस पत्थर का निर्माण संभव है। 
बगावत का बहाना। 
तीसरी आँख खोलने का सहज उपाय। 
हवा से दवा बनाने की तरकीब।   
सम्मोहित करने की कला। 
स्मरणशक्ति पावरफुल बनायें।
मन्त्रों का अचूक परिणाम। 
दुनिया को वश में करें।  

अब मैं आता हूँ वास्तु शास्त्र की चर्चा पर जिसमें फेंगसुई वास्तु की अद्भुत लाभ देने वाली कुछ चर्चित सामग्रियां सामिल हैं। परन्तु उससे पूर्व मैं वास्तु दोषों से परेशान सज्जनों से कहूँगा, यदि आपके यहाँ किसी प्रकार का वास्तु दोष का संदेह हो तो उसे यथाशीघ्र दूर करने का प्रयत्न करें। क्योंकि मकान में वास्तु दोष का होना कोई तंत्र मंत्र नहीं बल्कि यह एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है जो अशुभ है। वास्तु नियम के हिसाब से आवश्यक परिवर्तन करते ही आगामी समस्याओं से भी मुक्त रहेंगे तथा पारिवारिक सुख शांति में लगातार तरक्की पाएंगे। अतः आप अपने किसी करीबी जानकार से इसकी सलाह लें अथवा हमें भी फोन करें तो आपको उचित सलाह निश्चित दिया जायेगा। फेंगसुई वास्तु शास्त्र में आज अनेक ऐसी सामग्रियां उपलब्ध है जो आपके परसनल समस्याओं के लिए अचूक हैं। इन सामग्रियों के बारे में प्रायः लोग पूछते रहते हैं अतः सामग्रियों के नाम, लाभ और उसका सेवा शुल्क नीचे दिया जा रहा है।  इसकी शुद्धता, प्रयोग के बाद ही मालूम हो सकेगा। यदि आप इन्हें प्राप्त करना चाहें तो आपके नाम पते पर सुरक्षित डाक अथवा कोरियर से भेजने का प्रबंध कर दिया जायेगा। घर बैठे सामग्रियां मंगाने के नियम सबसे नीचे देखें।

                  अद्भुत उपयोगी सामग्रियां  

लाफिंग बुद्धा - चीन जैसे राष्ट्र के हर घर, व्यवसाय और कार्यस्थल पर हंसते हुए बुद्धा मूर्ति की स्थापना खाश रूप से देखी जाती है। अन्य देशों में भी जब ऐसी मूर्ति को फेंगसुई वास्तु सिधांत पर स्थापित किया गया तो लोग आवक रह गए। आज भारत के पारिवारिक या व्यावसायिक वर्गों में भी बुद्धा मूर्ति को स्थापित करना शुभ माना जाता है। ऐसी मूर्ति प्राप्त करके अपनी मकान, दुकान, आफिस या स्थान पर अन्दर इस प्रकार से स्थापित करें ताकि मूर्ति का चेहरा मुख्य द्वार को देखती हो। बुद्धा मूर्ति स्थापना से परिवार में शांति बनी रहती है। कार्य व्यवसाय तरक्की पर रहता है। नजर का दोष ख़त्म होता है। धन आगमन का श्रोत खुलता है। रुके कार्य पुनः आरम्भ हो जाते हैं। (इसे भोजन कक्ष में रखना मन है) 
लक्की कॉइन - ऐसा सौभाग्य युक्त सिक्का आज के युग में वरदान ही है। यह सिक्के आप दवारा इकट्ठे धन की सुरक्षा करते हैं। इसे अपने जेब, पर्स में रख सकते हैं। घर में, दुकान में, आफिस में पैसे रखने वाले स्थान पर रखें तथा लाल रिबन धागा में लगाकर दरवाजे की कुण्डी में लगा दे, इसे अपने बैंक के पास बुक या तिजोरी के दराज पर चिपका दें तो भी लाभ हाथों-हाथ मिलता है। यह सिक्का निर्धनता दूर करने में पूर्ण असरदाई होता है। बेशुमार धन संचय हेतु चीनी संस्कृति में इसके अनेक उदहारण मिलते हैं। इस सिक्के को आप अपने किसी प्रिय जन को उपहार करते हैं तो उसका प्रभाव आपके जीवन को भी प्रभावित करता है। इस लक्की कॉइन की एक विशेषता है कि, कहीं भी रखे तो इसका धागा अपने आप तब खुल जाता  है जब कोई आकस्मिक घटना होने को होती है। तब इसे पुनः बांध दिया जाता है। 
पियोनिया फूल -  जिस युवती की  शादी में अड़चनें आती हो तो पियोनिया के फूल चित्र को बैठका / ड्राईंग रूम में स्थापित कर दें और 6 रत्ती का सिद्ध किया पुखराज रत्न को गुरुवार के दिन सोने या पीतल में बनवाकर बाएं हाथ की तर्जनी में धारण करें। विवाह वाधा दूर होकर अच्छे घराने में रिश्ता निश्चित ही तय हो जाता। है। (फूल चित्र को शयन कक्ष में न लगायें)
पारद मुंगोनी- -  वैज्ञानिक और आध्यात्मिक तकनीक से निर्मित पारद मुंगोनी के बारे में यही समझ जाता है कि, यह सौ तालों की एक चाबी है. इसके शरीर से स्पर्श करने पर ही अपने पाजेटिव प्रभाव के चलते जीवन की समस्याओं को आपसे दूर रखता है. यह पारा और विशेष स्टोन से निर्मित होता है. इसके धारण से सामाजिक, पारिवारिक, व्यावसायिक, राजनैतिक आदि क्षेत्र में भारी सफल प्राप्त होती है. इसके धारण और स्पर्श से ही नौकरी, व्यवसाय, में लाभ, कोर्ट कचहरी में भारी  विजय, आकस्मिक मृत्यु और दुर्घटना का टालना निश्चित हो जाता है. तथा आपके अंदर किसी को भी वश में करने क्षमता आने लगती है. इससे शत्रु विरोधी भी परास्त होते हैं तथा लक्ष्मी का आशीर्वाद आश्चर्यजनक रूप से प्राप्त होने लगता है. इसे आजमाने की आवश्यकता नहीं, धारण करके लाभ उठाने कि जरुरत है. 
महोष्ठगंध तिलक पावडर -  प्राचीन ग्रथ साहित्यों के अनुसार किसी को भी सम्मोहित, आकर्षित करने के लिए अनेक उपाय है. जिसमें प्राचीन दुर्लभ जड़ी वनस्पतियों का महत्वपूर्ण स्थान है. अतः कई दुर्लभ जड़ी वनस्पतियों द्वारा महोष्ठगंध तिलक पावडर को निर्मित किया गया है.  इसके प्रयोग से मनोनुकूल लाभ प्राप्त किया हैं. आज हमने बिलकुल ही श्रेष्ठ और गोपनीय सामग्रियों के द्वारा निर्मित इस महोष्ठगंध तिलक पावडर को प्रस्तुत किया जा रहा है. इसे आंवले के रस में मिलाकर बिंदी या तिलक करने से सामने पड़ा कोई भी स्त्री पुरुष आकर्षित सम्मोहित होते हैं. और जब बात होती है तो आप सामने वाले पर भारी पड़ने लगते हैं. आज भी ज्ञानी संत और ऋषि लोग इस तिलक का प्रयोग कर समाज में आकर्षक बने मिलते हैं. निःसंदेह आपके लिए यह तिलक पैकेट अनेक रूप से लाभकारी हो सकता है. विस्तार से जानकारी के लिए हमारे फेसबुक पेज पर देखें या फोन करें. 
महा वशीकरण सिद्ध कवच -    

इसके धारण से सम्मोहन वशीकरण के साथ आपके बिजनेश-व्यवसाय, पर भी लाभ मिलता है और 

सामजिक, पारिवारिक, राजनैतिक विषयों में भी लाभ देता  है. क्योंकि महा वशीकरण सिद्ध कवच 

वैज्ञानिक और आध्यात्मिक रितियों से निर्माण संभव हुआ है. फलस्वरूप इसके द्वारा किसी भी 

पुरुष स्त्री, बच्चा बुड्ढ़ा, खुद ब खुद आपसे आकर्षित सम्मोहित होते रहते हैं. आप जिनके बारे में 

विचारते हैं उसकी तरफ से पहल होने लगती है. आपकी तरफ उसका झुकाव बढ़ता ही जाता है. 

आपसे चिपकते जाने में ही शान्ति महसूस करता है. महा वशीकरण सिद्ध कवच को धारण किये  

हुए जब आप किसी से वार्ता करते हैं तो आप उस पर भारी पड़ने लग जाते है और मजबूरन उसे 

आपकी बात माननी ही पड़ती  है. किसी भी दुश्मन विरोधी पर आपकी नजर पड़ती ही वह ठंडा पड़ 

जाता है और आपसे मित्रवत व्यवहार करने को विवस होता है. आप जिस कार्य क्षेत्र से जुड़े हैं, उसकी 

व्यर्थ वाधा, रुकावटें ख़त्म करके आपको सफलता का मार्ग दिखाता है. 


क्योंकि दुनिया में कुछ भी असंभव नहीं है. 
आपकी सोंच में दम हो, इरादों  में संकल्प हो तो आपको 


सफल होने से कोई माई का लाल नहीं रोक सकता. अतः आपकी स्थाई  और गैर स्थाई समस्याओं 


को देखते हुए इस अष्टधातु निर्मित पारद और विशेषरत्नों से जड़ित करामाती महावशीकरण सिद्ध कवच 


का निर्माण संभव हुआ है और इसे श्रेष्ठ नक्षत्र में सिद्ध कर आपके हित में अद्भुत औजार बना दिया गया है. 

अतः प्राचीन ग्रन्थ शास्त्रों के अनुसार अष्टधातु निर्मित इस कवच को ऋषि मुनियों ने भी जीवन 


को सफल सुखी और कार्य सिद्धके लिए उचित उपाय बताया है. इस वशीकरण कवच के धारण से अंदर 


के विकार और नकारात्मक तत्त्व छिन्न भिन्न हो जाते हैं और आप पॉजिटिव सोंच के मालिक बन 


जाते हैं. इसी कारण आपके मुख मंडल पर कोई दिव्य आकर्षण खिल खिल जाती है. और उसी आकर्षण 


में सम्मोहित होकर पुरुष या कोई भी स्त्री आपसे बातचीत करके अथवा आपके बारे में विचार करके 


प्रसन्न हो बैठते है. इसके धारण से दुष्ट आत्माएं और तंत्र मन्त्र का भय या आकस्मिक दुर्घटनाओं की 


शंका भी ख़त्म हो जाती है. अतः इसे आजमाने के लिए नहीं, बल्कि इसका भरपूर लाभ प्राप्त करने 


का दृढ विचार करते हुए शुक्र या सोमवार के दिन ११:४५ बजे दिन में ११ बार इस मन्त्र का शुद्ध उच्चारण 


( मन्त्र - ॐ खं खीं खें नमः ) करके गले में धारण करके आश्चर्यजनक लाभ प्राप्त करें. 
नोट - इस सम्बन्ध में किसी भी तरह की अन्य जानकारी के लिए फोन कर सकते हैं.  9565120423

   
सिद्ध नवग्रह मुद्रिका - सुख-समृद्धि  और वैभवशाली जीवन  लिए सभी  बैलेंस में होना आवश्यक है। यदि आपको लगता है कि कोई ग्रह बार-बार आपकी सफलता छिन लिया करता है तो फ़ौरन सिद्ध नवग्रह मुद्रिका दाहिने हाथ की किसी भी उंगुली में धारण कर लें तो हर कार्य में सफलता मिलने लगती है। इसके धारण से दुर्भाग्य का नाश होता है। नवरात्रिकाल में सिद्ध यह मुद्रिका निश्चित ही अचूक व प्रभावशाली उपाय है। अष्ठ धातु  निर्मित यह मुद्रिका देवताओं में भी सर्वप्रिय रहा है। इसके धारण से व्यवसाय चमक उठता है। नौकरी की इक्छा होती है। प्रमोसन मिलता है। दूसरों पर सम्मोहन की क्षमता बनती है। कर्ज से छुटकारा मिलता है। दुश्मन विरोधी नम्र बनते हैं और मन की समस्त अभिलाषाएं पूरी होती हैं। 
क्रिस्टल बाल -  क्रिस्टल बाल एक वैज्ञानिक वस्तु है जिसका कार्य है नकारात्मक दोष ख़त्म करके शांति और समृद्धि प्रदान करना। क्रिस्टल बाल मकान, दुकान या आफिस में इस तरह से लटकाएं ताकि लोगों की तुरंत दृष्टि पहुच सके। इसके प्रयोग से आपसे मिलने वाले आपके प्रभाव में बने रहते हैं। टेंसन, दुर्घटना, बीमारी कंट्रोल में होती है। आगंतुकों में वृद्धि होती है। बुरी नजरें व तंत्र मंत्र का प्रभाव ख़त्म होकर कार्य-व्यवसाय चमक उठता है। रोगी व्यक्ति के कमरे में लगा दें तो रोग समाप्त होने लगता है।     
करामाती कछुआ -  जिस मकान, दुकान, आफिस या कार्यालय में कछुआ की स्थापना की जाती है वहां की समस्याएं ख़त्म होकर चौतरफा लाभ होने लगता है। मकान में कछुआ रखने से परिवार के सदस्यों को बीमारी रहित लम्बी उम्र प्राप्त होती है। दुश्मनी ख़त्म होती है। पारिवारिक व मानसिक लाभ मिलता है। परिवार में संतान वृद्धि की स्थिति बनती है। इसे पूर्व उत्तर की दिशा में स्थान देकर आकस्मिक लाभ देखा जा सकता है।      
सभी प्रकार का माला - रुद्राक्ष माला. नवरत्न माला, मोती की माला. स्फटिक माला, तुलसी की माला, वैजंती माला, हकीक माला, अर्थात सभी तरह के माला भी उपलब्ध. इसके धारण से मनोकामना की पूर्ति होती है। शरीर स्वस्थ व सम्मोहक बनता है। धर्म कर्म में रूचि बढती है।  
फिनिक्स -  यह लाल रंग का अद्भुत पक्षी होता है। नौकरी वाधा दूर करने में इसे अचूक माना जाता है तथा व्यापार के दवारा धन की इक्छा रखने वालों के लिए यह कारगर होता है।       
शुद्ध स्फाटिक माला - शुद्ध स्फटिक माला धारण से मानसिक तनाव ख़त्म होता है। स्मरण शक्ति में वृद्धि होने लगती है। मन शीतल व् शांत बनता है। इसके धारण से आंतरिक ऊर्जा में भ बढ़ोतरी होती है  पर भी अपनी बातों का असर पड़ता है। वाणी प्रभावशाली बनते हर कार्य क्षेत्र में सुगमता आ जाती है।      
सभी प्रकार के यंत्र - श्री यंत्र, कुबेर यंत्र, लक्ष्मी यंत्र, गणेश यंत्र. महा मृत्युंजय यंत्र, बगलामुखी यंत्र, वास्तु दोष यंत्र, व्यापार यंत्र, पुत्र प्राप्ति यंत्र, वाहन यंत्र, सरस्वती यंत्र, ऋणमोचक यंत्र, कनकधारा यंत्र, उर्वशी यंत्र, तारा यंत्र आदि सभी तरह के यंत्र प्राप्त किया जा सकता है.        
पारद शिवलिंग - जब किसी का भाग्य उदय होता है तो वह पारे के शिवलिंग का दर्शन का पाता है। जब दुर्भाग्य का नाश होना होता है तो कोई व्यक्ति पारद शिवलिंग की स्थापना करता है। पारा एक चंचल तत्व होता है जिसे भूमि पर गिर जाने पर हाथ से उठा पाना असंभव ही होता है। परन्तु इसी पारे को जब दुर्गम वनस्पत्तियों से ठोस करके संस्कारित कर दिया जाता है तो यह अद्भुत फल देने वाला उपयोगी यन्त्र बनकर असंभव कार्य संभव कर दिखाता है। अतः ऐसे सिद्ध शुद्ध और संस्कारित पारद शिवलिंग का मात्र दर्शन करना ही सौभाग्य प्रदान करता है। ऐसे शिवलिंग के सम्मुख यदि 11 बार ॐ नमः शिवाय का उच्चारण करके घर से  निकलें तो वाधाएं ख़त्म होकर सभी कार्य बनते है। इसकी स्थापना से मन की इक्षाये पूरी होती है। सुख समृद्धि और सौभाग्य अनायास ही प्राप्त होने लगता हैं।  
वाहन दुर्घटना वचाव यन्त्र  - स्कूटर , मोटर साईकिल, कार, जीप, ट्रक, बस, ट्रेक्टर या किसी भी वाहन पर नव्रत्रिकाल में सिद्ध किया वाहन दुर्घटना वचाव यन्त्र लगा दें तो आकस्मिक दुर्घटनाएं निश्चित ही टल जाती है तथा घटना दुर्घटना का पूर्वानुमान होने लग जाता है। इसे अनेक लोग आजमा चुके हैं।          
महोष्ठ्गंध तिलक - महोष्ठ्गंध कुछ दुर्लभ वनस्पत्तियों के सहयोग से निर्माण किया गया यह बिंदी तिलक करने की अद्भुत सामग्री होता है। किसी को भी सम्मोहित करने की यह आसान और अद्भुत व्यवस्था है। महोष्ठ्गंध पावडर को आंवले के रस में मिलाकर तिलक या बिंदी कर लें तो सामने पड़ा व्यक्ति या प्राणी आपके प्रति सम्मोहित हो जाता है। आप जो भी कहते हैं उसे स्वीकार करना पड़ता है तथा भविष्य में वह आपके लिए भरोसेमंद बना रहता है।  इसे प्रयोग करके इसका चमत्कार देख सकते हैं।         
सियारसिंगी - श्रेष्ठ नक्षत्र में सिद्ध किया सियारसिंगी का तंत्र शास्त्र में अद्भुत महिमा दिया गया है। गीदड़ का मष्तिष्क विकृत होने के बाद ही मनुष्य इसे प्राप्त कर पाता है। इसकी पहचान यह है कि, सिंदूर और कपूर के साथ इसे रखने पर इसके बाल बढ़ते हैं। अतः  सियारसिंगी  कहीं से भी प्राप्त कर चंडी की डब्बी या लाल वस्त्र में करके सिंदूर कपूर के साथ जेवर, रुपये पैसे रखने वाले स्थान पर रखें तो धनवृद्धि के मार्ग खुलते हैं। कर्ज से मुक्ति मिलती है। दुर्घटनाओं से रक्षा होती है। मुक़दमा में विजय की प्राप्ति होती है। सामाजिक प्रतिष्ठा बढती है। अपने अन्दर सम्मोहन की उर्जा बनता है।      
लक्की कार्ड  - हर क्षेत्र में दुनिया को मुट्ठी में  करने लिए के लक्की कार्ड को जेब या पर्स में अवश्य रखें। लक्की कार्ड से सभी कार्य सफल होते हैं। अधिक से अधिक मित्र बनते हैं। इंटरव्यू परीक्षा साकार होता है। अधुरा कार्य पूर्ण होता है। बार-बार ही भाग्य साथ देने लगता है। आजमायें नहीं, इसका लाभ आज ही से उठायें।
एकाक्षी नारियल -  यह समुद्री फल होता है जिसमें लक्ष्मी निवास करती हैं। इसे प्राप्त करके घर के पूजा स्थान या गल्ला में गंगाजल से नहलाकर रखा जाय तो धन की बढ़ोतरी उसी दिन से आरम्भ हो जाती है। यदि ग्रहण, दीपावली, नवरात्रि या होलिका के समय एक साथ चार नारियल लेकर अपने सर के चारों ओर घुमाकर पीले वस्त्र में उसे बिना टूटे चावल के साथ बांधकर कहीं सुरक्षित रख दें तो लक्ष्मी सदा आप पर मेहरबान बनी रहती हैं।     
नशा मुक्ति चूर्ण-  यदि आपके परिवार में या मित्र परिचितों में कोई शराब अथवा किसी भी नशे की लत है तो उसे नशा मुक्ति चूर्ण रोज रात्रि में एक चम्मच किसी भी चीज में मिलाकर खिलाएं तो व्यक्ति में नशे की नकारात्मक इक्षा समाप्त होने लगती है। धीरे धीरे वह पुरुष या स्त्री अपने नशे की लत को ही लात मारने लगता हैं। आगे चलकर नशे की उस लत से सदा के लिए आजाद हो जाता हैं। यह चूर दुर्लभ जड़ी वनस्पतियों से निर्मित होता है. इसके सेवन से और भी लाभ संभव हो उठता है. 
एकमुखी रुद्राक्ष -  यदिएकमुखी रुद्राक्ष अपने आपमें दुर्लभ सामग्री है। इसकी उपयोगिता इसी से समझी जा सकती है कि संत समाज से लेकर आम आदमी तक इसे प्राप्त कर लेना ही अपना सौभाग्य मानता है। ऐसे दुर्लभ रुद्राक्ष को पूजा स्थान में रखें तो भगवान् शिव प्रसन्न होते हैं। मनोइक्षाये पूरी होती है। इसे लाल धागे में या चांदी में मढ़ा कर गले में धारण करें तो समस्त कामनाओं की पूर्ति होती है।  
रुद्राक्ष दाना-  एक मुखी से १४ मुखी तक के रुद्राक्ष दाना अपनी जरुरत पर प्राप्त कर सकते हैं. रुद्राक्ष धारण से शरीर स्वस्थ और सम्मोहक बनता है. कार्यों में सिद्धि प्राप्त होती है. किसी पर किये कराये का संदेह ख़त्म हो जाता है. बुद्धि एकाग्र बनती है. सोंचने समझने की शक्ति में बढ़ोतरी होती है. 
लक्ष्मी चरण पादुका -  लक्ष्मी के १६ शुभ चिन्हों वाला चरण पादुका जहाँ भी स्थापित किया जाता है वहां से समस्याओं का नाश होते देखा गया है। इसकी स्थापना से धनाभाव ख़त्म होकर स्थाई धन संपत्ति का मार्ग प्रसस्त होता है। इसे मकान, दुकान, आफिस या कहीं भी दरवाजे पर चिपकाना भी शुभ होता है। अष्ठ धातु से निर्मित यह चरण पादुका सुख समृद्धि हेतु निश्चित ही उपयोगी सामग्री है।
राशि कार्ड -  सभी राशियों के कार्ड जैसे मेष, बृषभ ,मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर,  कुम्भ, मीन होता है। अपने राशि के कार्ड को प्राप्त कर इसे नेमोलोजी सिस्टम के अनुसार खाश नंबर का १० रुपये के नोट के साथ अपने पास रखें तो इसके प्रभावी सफलता से आप गर्व करेंगे। पढाई, परिक्षा, व्यवसाय, सर्विस, सम्मोहन एवं सभी प्रकार की सफलताओं को निकट लाता है।   
पुत्रप्राप्ति यंत्र  -  सभी  निःसंतान व्यक्तियों के जीवन से पुत्राभाव दूर करके संतान की उपलब्धि पुत्र प्राप्ति यन्त्र  से ही संभव होता है। प्रातःकाल में इसे दूध से नहलाकर पूजा स्थान में स्थापित करे तो पुत्र की अभिलाषा पूरी होती है। 
लग्न विवाह यंत्र - जिस युवक या युवती के विवाह में वाधा या रुकावटें आ रही हो तो निश्चिन्त होकर आप लग्न या विवाह यंत्र को पूर्व उत्तर दिशा में स्थापित कर दें तो कुछ ही दिनों में वधाएं ख़त्म होकर अच्छे घराने में रिश्ता बन जाता है तथा जीवन सुखी व संपन्नता के साथ व्यतीत होता है। 
बगलामुखी यंत्र - चुनाव को सफल बनाने, राजनितिक लाभ प्राप्त करने, कोर्ट कचहरी, मुक़दमे में विजय हासिल करने, दुश्मनी ख़त्म करने में बगलामुखी यन्त्र की भूमिका श्रेष्ठ मानी गई है। अतः नव रात्रि काल में सिद्ध श्री बगलामुखी यन्त्र प्राप्तकर सोमवार को पूजा स्थान पर स्थापित कर दें। यन्त्र का दर्शन करके घर से बाहर निकले तो पूरा दिन सफल सुखद होगा।   
मोती की माला - मोती चन्द्रमा का रत्न होता है। मोती की माला गले में होने से व्यक्तित्व चंद्रमा की तरह शीतल सहज शांत और सम्मोहन  युक्त बनता है। हमेशा तनाव ग्रस्त रहने वाले पुरुष स्त्री शुद्ध मोती की माला गले में धारण कर जीवन के सभी क्षेत्रो में जगमगाहट भर सकते हैं।  .
पिरामिड लाकेट - जिस व्यक्ति के ह्रदय से पिरामिड लाकेट हर समय स्पर्श करता रहता है, उसे हर कार्य में सफलता निश्चित हो जाती है। मार्ग की वाधाएं ख़त्म होकर मनोइक्षाये पूरी होती है। क्योंकि पिरामिड नकारात्मक उर्जा को बाहर करता है और सोंची गई इच्छा को पूरे कामयाबी के साथ पूरी होने की स्थिति बनाता है। अतः ऐसा वैज्ञानिक यन्त्र तो हर किसी को धारण करना ही चाहिए।  
बिल्ली की जेर - अधिकांश बिल्लियाँ बच्चा पैदा करते ही अपनी जेर या नाल खा जाया करती हैं। लेकिन  आसाम के भगवती कामक्षl के क्षेत्र में बिल्ली बच्चा पैदा करने के बाद प्रायः उसको खाना भूल जाती हैं। बिल्ली की जेर अथवा नाल का धन संपत्ति संग्रह में बड़ा ही महत्व है। इसे तिजोरी, लाकर, गल्ला या रुपये रखने वाले स्थान पर लाल वस्त्र या चंडी की डब्बी में करके  रखें तो दिन दुनी रात चौगुनी तरक्की से  दिनों की छुट्टी  जाती है। लक्ष्मी की कृपा देखते ही बनती है। 
दक्षिणमुखी शंख  - यह शंख अत्यंत ही भाग्यकारक माना जाता है। इसे प्राप्त करके किसी भी शुभ दिन को जल से स्नान कराकर पूजा स्थान पर लाल वस्त्र पर रखें। शंख में बिना टूटे चावल का दाना भरकर वस्त्र से बांध दें तो घर में लक्ष्मी का आगमन स्पस्ट दिखने लग जाता है। इसे धुप बत्ती से  पूजन किया जा सकता है।    
टाइगर माला  - पुखराज रत्न अपने आपमें अद्भुत सफलतादायक माना जाता है। टाइगर स्टोन भी पुखराज की भांति अद्भुत फलदायक होता है। टाइगर माला धारण से समाज से प्रतिष्ठा मिलती है। व्यवसाय और सर्विस में तरक्की होती है। कार्यों की वाधाएं समाप्त होकर सफलताओं की झड़ियाँ लग जाती है। इसे प्राप्त कर गुरुवार को गले में धारण करें।     
पारे के लक्ष्मी गणेश - पारे निर्मित लक्ष्मी गणेश की मूर्ति दीपावली पर स्थापित करना महाशुभ घटना कही जाती है। इसे पूजा स्थान पर रखने मात्र से भाग्य  खिल उठता है। जीवन पर्यंत धन धन्य की पूर्णता बनी रहती है। ऐसी मूर्ति की स्थापना से सुख समृद्धि अनायास ही प्राप्त होते रहते हैं।    
हत्था जोड़ी - हत्था जोड़ी एक अद्भुत सामग्री है। इसे लाल वस्त्र या चांदी की डब्बी में शुद्धता से रखें तो सभी प्रकार की इक्षा शीघ्र पूरी होने लगती है। सुदूर-वन जंगलों से प्राप्त हत्था जोड़ी रक वस्पत्ति ही होती है मानव उंगुलियों जैसी प्रतीत होती है। हत्था जोड़ी में चैतन्य दुर्गा का निवास माना जाता है। इसकी स्थापना के तुरंत बाद ही फल की सम्भावना स्पस्ट देखी जाती है। हत्था जोड़ी से चुनाव में जीत निश्चित हो जाती है। कर्ज से मुक्ति मिलती है। कोर्ट कचहरी मुकदमें में विजय प्राप्त होता है। व्यापार आश्चर्यजनक रूप से तरक्की करता है। भूमि दोष, भुत प्रेत,  तांत्रिक दोष वाधा ख़त्म होता है। दूसरों को सम्मोहित करने की क्षमता बन जाती है। आज के युग में हत्था जोड़ी निश्चित ही चमत्कारी सामग्री है। (इसे पास में लेकर  सोया जाता है) 
सम्पूर्ण वास्तुदोष नाशक यन्त्र - कोई भी ऐसा मकान, दूकान, आफिस या स्थान नहीं जहाँ वास्तु दोष न हो। दोष होने पर कार्य वाधा, व्यवसाय वाधा, बिमारी, धनाभाव, लाचारी, पारिवारिक टेंसन, आकस्मिक दुर्घटनाएं प्रायः होती ही रहती है। अतः तोड़ फोड़ से बचते हुए वास्तु दोष ख़त्म करने की यह सटीक सामग्री है। वास्तु दोष नाशक यन्त्र प्राप्त कर पूरब उत्तर के कोने में दीवाल पर लगा दें या अपने पूजा स्थान में स्थापित कर दें तो 12 घंटे पश्चात् ही यह प्रभावी बनते हुए दोष ख़त्म करने लगता है। इसकी स्थापना से पारिवारिक प्रेम बनता है। रुके कार्य संपन्न होते हैं। ऋण मुक्ति से राहत मिलती है। सर्विस और व्यवसाय में अनुकूल लाभ प्राप्त होता है। 
सम्पूर्ण व्यापर वृद्धि यन्त्र - यदि आप किसी भी बिजनेस व्यवसाय से जुड़े हैं। तरक्की न हो पा  रही है। कर्ज से परेशान हो गए हैं या अन्य किसी भी तरह की समस्या आ रही है तो दुखित होने की जरुरत नहीं है। आप यथाशीघ्र शुभ मुहूर्त में पुरे विधि विधान से सिद्ध किया हुआ व्यापार वृद्धि यन्त्र प्राप्त करके अपने मकान या दुकान के पूरब उत्तर कोने में स्थापित कर दें। अब हफ्ता 10 दिन में यन्त्र का प्रभाव देख सकते हैं। 
नवरत्न माला - नवरात्रि काल में सिद्ध किया यह नवरत्न माला आज के वैज्ञानिक युग की चुनौती ही है। इसे पुरुष स्त्री, बच्चा बुढा, कोई भी गले में धारण करके अनुकूल लाभ प्राप्त कर सकता हैं। नवरत्न माला धारण से ब्रह्माण्ड के समस्त ग्रह साथ देते, हैं जिससे भाग्य की लकीरें स्वय बदलना आरम्भ हो जाती है। रुके कार्य पूर्ण होते हैं। धन का आभाव समाप्त होता है। ऋण मुक्ति संभव हो जाती है। समाज में इज्जत प्रतिष्ठा बनती है तथा इसमें नवग्रह की उर्जा के चलते किसी को भी सम्मोहित करने की क्षमता आती है। (नवरत्न माला 9 प्रकार के बहुमूल्य रत्नों से निर्मित होता है, जिसे नवरात्रि  काल में सिद्ध कर दिया जाता है)

ध्यान रखें- सभी सामग्रियां ग्रहण, होलिका, नवरात्रि या दीपावली के शुभ क्षण में सिद्ध की हुई होती है ताकि आपको  अनुकूल लाभ यथाशीघ्र प्राप्त हो। अतः सामग्रियों को आप पूरी श्रधा विश्वास के साथ प्रयोग करें, बेशक आपको पूरा पूरा लाभ प्राप्त होगा।  
नोट - जो भी सामग्री प्राप्त करना चाहें, आप घर बैठे डाक से प्राप्त कर सकते है। आप फोन कर लें तो अच्छा रहेगा।                                                                 न. - 9565120423 अशोक भैया   -   ऋषिकेश, दिल्ली   
किसी भी जानकारी के लिए फोन करें या व्हाट्सएप पर मैसेज करें। आपका सहयोग किया जाएगा।   - धन्यवाद।
                                                                                      

Sunday, 25 August 2013

सत्य की सुगंध



                            सत्य  की सुगंध

             (एक सुखद अनहोनी घटना)

          बहुत साल पहले पढाई के समय में ही मैं जिज्ञासु किस्म का रहा। भिन्न-भिन्न ज्ञान-विज्ञान में मेरी रूचि हुआ करती। मैंने सुना था, समुद्र में कोई ऐसी मछली होती है जो अपने शरीर में बिजली उत्पन्न कर लिया करती। मैं उस मछली की जानकारी तलाशना शुरू कर दिया। ढेर सारी किताबें खरीदकर पढा, बहुतों से उस मछली के बारे में जानकारी लेना चाहा किन्तु सही जानकारी का बिलकुल ही अभाव रहा। फिर मैं कोलकत्ता नेशनल लायब्रेरी का सदस्य बनकर वहां से डाक के जरिये किताबें मंगाकर पढ़ता रहा, पर बात वहीँ की वहीँ रुकी रही।  

          हाँ एक बात जरुर हुआ  इसी सिलसिले में मैं जोधपुर (राजस्थान) स्थित पूज्य गुरुदेव डॉ नारायणदत श्रीमाली जी और वहां से प्रकाशित पत्रिका तंत्र मंत्र यन्त्र विज्ञान से परिचित हुआ। पत्रिका पढ़कर अच्छा लगा, साथ ही मेरा मकसद कामयाब होता नजर आने लगा। आगे चलकर पत्रिका का नियमित सदस्य बनना पड़ा क्योंकि अब यूँ लग रहा था, मानो मैं किसी मैग्नेटिक दुनिया में प्रवेश करता जा रहा हूँ। वह पत्रिका पढ़कर ही लग गया कि अब मछली मिले न मिले एक सक्षम सामर्थ्य गुरुदेव मिल गए है तो मैं भी वो विद्युत् उत्पन्न कर ही सकता हूँ। 

          मैं लगातार संपर्क में रहा घर बैठे कई प्रकार के योग साधना और प्रयोग भी किये जिससे मेरे आत्मविश्वास और इक्षाशक्ति को वृद्धि और विस्तार होने में बहुत मदद मिली। मगर तब तक गुरुदेव से प्रत्यक्ष मिलने और उनसे कुछ हासिल करने की आरजू बहुत ही तेज हो चली थी। जोधपुर का कई प्रोग्राम बनाया और फेल होता गया। कभी मन में कोई संदेह घर कर जाता तो कभी व्यवस्था शून्य हो जाता। किन्तु एक रात मैं विस्तर पे था। जोधपुर आश्रम के बारे में ही सोंच रहा था ........तो लगा इस तरह तो सोंचता ही रह जाऊंगा। उस रात दृढ निश्चय किया और अगली सुबह निकल गया गुरुआश्रम के लिए जोधपुर।  

          मैं दिल्ली गया और दिल्ली से जोधपुर। उन दिनों छोटी लाइन ही थी। बहरहाल मैं आश्रम पहुँच गया। और नजारा देखा तो बड़ा ही अफसोस हुआ अपने आप पर कि, मैंने इतना विलम्ब क्यों किया यहाँ आने में। यहाँ तो सब कुछ संभव है। उस समय वहां कोई महोत्सव था। इसलिए उस शिविर आयोजन में देश और विदेश से तमाम शिष्यों का आगमन जारी था। मेरे लिए तो वह सब कुछ नया और अनहोनी घटना की तरह ही था। चारों तरफ उमंग, हर तरफ उत्साह। दृश्य देखकर मैं अपना सब कुछ भूल चूका था। मैं  कौन  हूँ, कहा से आया हूँ। बस ये मालूम था कि मैं गुरुदेव से मिलने आया हूँ, कुछ हासिल करने आया हूँ।  

          संदेह ऐसी चीज है जो अक्सर ही सौभाग्य पर ग्रहण लगा देती है। क्योंकि  हर आदमी हर बात ठोक बजाकर देख लेना चाहता है। जिसे (आज) मैं उचित नहीं मानता। कभी रिश्क भी उठाये जाते है। विश्वास भी किया जाता है। उस वक्त मैं स्वयं बार-बार अपने आप पर खीज रहा था कि, इतने साल से मैं संदेह लिए सोंचता रहा, वहां क्या होगा, कैसा होगा आदि आदि। खैर वहां मेला सा प्रतीत हो रहा था। साधना प्रवचन जारी था।  मैंने स्टाल से गुरुदेव के बहुत सारे बुक्स ख़रीदे। आडिओ कैसेट और भी कुछ सामग्रियां खरीदी। स्थिति तो ऐसी थी कि हर कोई वहा का सब कुछ ले लेना चाहता था क्योंकि हर चीज दुर्लभ और अनोखा था। 

          शिविर में गुरुदेव प्रवचन के माध्यम से लक्ष्मी साधना, सरस्वती साधना, सम्मोहन साधना, वशीकरण साधना, कुंडलिनी जागरण आदि के बारे में बारीकी से बताते फिर अपने सानिध्य में प्रत्यक्ष साधना कराते। गुरु दिक्षा के साथ-साथ अन्यानेक दुर्लभ दिक्षा भी प्रदान किया जाता। मैं अपना सौभाग्य मानते हुए कार्यक्रमों में भाग लेता रहा फिर घर आकर उसके निरंतर अभ्यास में लग जाता। उन्होंने ही बताया था कि, सम्मोहन वशीकरण शरीर और मन का विज्ञान है। इस रहस्य को हर किसी को जानना चाहिए और जब भी, जहाँ भी अवसर मिले तो किसी के सही मार्गदर्शन में इस ज्ञान को प्राप्त कर लेना चाहिए। 

             सम्मोहन विज्ञान तो दुनिया का एक ऐसा विषय है जिसके दवारा कठिन से कठिन कार्य संपन्न  किये जा सकते हैं। अपने शरीर में विद्युत् यानि घोर आकर्षण तरंग एकत्रित किया जा सकता है और किसी भी प्राणी को उस प्रभाव से आकर्षित कर उसे स्तब्ध किया जा सकता है। समाज में लोकप्रिय बना जा सकता है। असाध्य बीमारियों का उपचार किया जा सकता है। गलत पथ पर जा रहे लोगों को सुधारा जा सकता है। पारिवारिक तनाव ख़त्म किया जा सकता है। नाराज चल रहे प्रेमी या किसी व्यक्ति को अपने अनुकूल बनाया जा सकता है। दूसरों के मन की बात पता किया जा सकता है। कुंडलिनी जागरण में सहयोग पाया जा सकता है। यादाश्त काफी तेज किया जा सकता है इत्यादि।

          सभी प्रकार की समस्याओं का समाधान किया जा सकता है। सम्मोहन की शिक्षा दीक्षा  से समाज में श्रेष्ठ व्यक्ति बना जा सकता है और यह लाभ समान रूप से स्त्री पुरुष कोई भी प्राप्त कर सकता है। आज यह महासौभाग्य की बात है कि, मैं अपने अनुभव की बात बता रहा हूँ तथा सम्मोहन विज्ञान को सिखने समझने का अवसर भी दे रहा हूँ क्योंकि किसी भी ज्ञान का सही प्रकार से विस्तार होना चाहिए ताकि उसका लाभ साधारण व्यक्ति भी आसानी से उठाये। सम्मोहन विज्ञान पर कई प्रामाणिक लेख मैंने इससे पहले भी दिया है। इसे सिखने समझने की आसान विधि और उपाय भी दिया गया है।

          आज वे सभी भाई बन्धु और शुभचिंतक सौभाग्यशाली हैं जो संदेह से परे हटकर सम्मोहन अभ्यास आरम्भ कर चुके हैं और लगातार हमारे संपर्क में रहते हुए सफलता के पथ पर है। उनके नाम पत्ते फोन नंबर शीघ्र ही प्रकाशित किये जायेंगे क्योंकि कुछ लोग आज भी संदेह की गिरफ्त में हैं कि, ऐसा संभव नहीं जबकि सम्मोहन विज्ञान ही ऐसा शस्त्र और शास्त्र है जहाँ कुछ भी असंभव नहीं। 24-25 वर्ष पहले मैं भी ऐसा ही समझता था। आज मुझे पढ़कर अंदाजा लगाया जा सकता है कि सम्मोहन शास्त्र किसे कहते हैं। मैं अब भी कह रहा हूँ, आप जहाँ भी रहिये, अपनी समस्याएँ मुझे फोन, या नेट मैसेज से बताइए। मेरा पूरा प्रयत्न होगा आपकी समस्या का समाधान दूँ। किन्तु मेरी राय है, सोंच ऐसा बनाइये ताकि समस्याओं के समाधान आप खुद कर सके। यह मेरे लिए भी गर्व की बात होगी। 

          सम्मोहन विज्ञान एक ज्ञान है इसे सिखने सिखाने में किसी प्रकार का कोई शुल्क नहीं होना चाहिए। किन्तु दूसरे पक्ष से देखा जाय तो ऐसा दुर्लभ ज्ञान महाज्ञान तो अपना सब कुछ न्योछावर करके भी प्राप्त कर लेना चाहिए। सम्मोहन विज्ञान मात्र  किसी आकर्षण का विषय नहीं है। यह तो मानव तन में प्रारंभ से स्थित चुम्बकीय तरंगों का ज्ञान है। यह तरंगें सुप्त अवस्था में होती हैं जिसे अज्ञानता वश हम उसे नजरंदाज करते रहते हैं। इसके अभ्यास पूर्णता के बाद व्यक्ति, सामान्य व्यक्ति न होकर अपने क्षेत्र का प्रभावशाली व्यक्तित्व बन चुका होता है। अतः सम्मोहन अभ्यास सामग्री पैकेट प्राप्त करने के लिए आप फोन से संपर्क कर लें।   फोन न. 9565120423 (दिल्ली-ऋषिकेश) 

नोट- यह आपार हर्ष का विषय है कि, हमने अपने पूर्व सूचना के मुताबिक त्राटक ज्ञान के साथ सम्मोहन, वशीकरण, कुंडलिनी जागरण का 30 से 45 दिनों का विशेष कोर्स जारी कर दिया है। इस दुर्लभ त्राटक सम्मोहन कोर्स को अनेक प्रांतों के भाई बंधु और शुभचिंतक लगन पूर्वक कर रहे हैं। अतः मंगल कामना हैं इनकी सफलता के लिए तथा आपके लिए हार्दिक कामना है आपके आगमन के लिए। क्योंकि आप दुनिया से बहुत कुछ हासिल कर सकते हैं परन्तु ऐसा अद्भुत और दुर्लभ ज्ञान कहीं और से प्राप्त करना बहुत ही कठिन है। नामुमकिन भी मान लीजिये। इस सम्बन्ध में किसी भी जानकारी के लिएआप बेहिचक हमें फोन कर सकते हैं। आपको हमारा भरपूर सहयोग प्राप्त होगा, भरोसा रखें।   
                                                            हमारा जीमेल एड्रेस ashokbhaiya666@gmail.com

जो लोग अभ्यास आरम्भ कर रहे हैं या कर चुके हैं, वे अपना अनुभव या समस्याएं हमें निःसंकोच बताते रहें। आवश्यक होने पर सलाह भी लेते रहें। सम्मोहन अभ्यास में त्राटक का सर्वाधिक महत्व है और त्राटक नेत्रों के माध्यम से ही किया जाता है। अभ्यासकाल में नेत्रों को किसी प्रकार का कोई नुकसान न हो इस कारण मार्गदर्शन अनिवार्य होता है। आप इसमें पूर्ण सफल हों।  
मंगल कामनाओं के साथ ! - अशोक भैया   9565120423 (दिल्ली-ऋषिकेश ) 
               
अतः आप दुनिया को हैरत में डालने वाला सम्मोहन शिक्षा प्राप्त करना चाह्ते हैं तो हमारे नम्बर पर फ़ोन कर सकते हैं. 9565120423 - अशोक भैया, गोरखपुर, ऋषिकेश, हरिद्वार, दिल्ली, इसी के साथ - मंगल कामनाओं सहित- अशोक भैया 
आप हमारे फेसबुक पेज से जुड़कर अपनी समस्याओं के समाधान और अन्यानेक लाभ उठायें. इसके लिए फेसबुक मेंashokbhaiya666@gmail.com टाइप करें. 

किसी भी जानकारी के लिए फोन करें या व्हाट्सएप पर मैसेज करें। आपका सहयोग किया जाएगा।   - धन्यवाद।

  

Wednesday, 7 August 2013

सुषुम्ना चक्र जागरण-सम्मोहन शास्त्र



  सम्मोहन उर्जा की अचूक विधि 

                (सुषुम्ना चक्र जागरण)


            आज हर व्यक्ति अपनी ही अनेक समस्याओं से परेशान और तंग है। परिवार के सदस्यों की अपनी-अपनी विभिन्न समस्याएँ अलग है। कोई अपने आप से प्रसन्न नहीं। किसी का किसी से मधुर सम्बन्ध नहीं। सारी की सारी बुद्धि कुंद बनकर रह गयी है। आपकी बात कोई नहीं मानता। आपकी बातों का किसी पर कोई प्रभाव ही नहीं पड़ता। आप कहीं मिलने जाते हैं तो कोई अमिट छाप नहीं बना पाते और आज के इस चुनौतियों वाले युग में ऐसी साधारण सी जिंदगी में कुछ हो भी नहीं सकता।  
          
          जबकि होना यह चाहिए कि, आप जिससे मिलें या किसी से मुलाकात हो, तो आपको जीवन भर सम्मान पूर्वक याद रखा जाएँ। आप जिसको सलाह और सहयोग दें उसका ह्रदय से स्वीकार किया जाये। आप किसी को कोई आज्ञा दें तो वह दौड़कर पूरी करे। यानी आप जिसको जो भी कह दें, सामने वाला उसे प्राथमिक तौर पर अपने ह्रदय में स्थान दे। इसे कहते हैं जीवन की एक बेमिशाल पहुँच। एक आकर्षण, एक अद्दभुत सम्मोहन और जीवन में बिना सम्मोहन उर्जा के हम कुछ कर भी नहीं सकते, ना ही शुख-शांति से जीवन गुजार सकते, ना कोई विशेष उपलब्धि प्राप्त कर सकते हैं। 
          
         प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ ब्रूम के शोधों के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति (पुरुष /स्त्री) में सम्मोहन शक्ति की उर्जा है। यह शक्ति शरीर में अदृश्य तरंगों के रूप में स्थित है। इन तरंगों के माध्यम से कोई भी व्यक्ति किसी भी प्राणी को सम्मोहित कर सकता है। किसी के भी विचारों को अपने अनुकूल बना सकता है। किन्तु दुर्भाग्य कि, हमें सम्मोहन के उन श्रोतों का ही कुछ पता नही। इन तरंगों का किस प्रकार से लाभ उठाया जा सके इसका भी ज्ञान नहीं। जबकि इन्हीं तरंगों के प्रभाव में जीवन की सारी हलचल है। सफलता असफलता, शांति अशांति, सब कुछ अदृश्य तरंगों की प्रतिक्रिया से है। 

             सच मानिए तो आपका शरीर ही पारसमणि के समान है जिससे कोई लोहा स्पर्श हो जाये तो स्वर्ण में बदल जाय। परन्तु इसका अद्भुत ज्ञान होना चाहिए वरना कोई भी यन्त्र बंद रहने की दशा में निष्क्रिय हो जाया करता है। अतः हमें अपने अन्दर के सम्मोहन तरंगों के विशाल खजाने तक पहुँचाना है और खजाने के द्वार को खोलकर भरपूर लाभ उठाना ही है। उस निष्क्रय पड़े उर्जा तरंगों को सक्रिय करना है। अब जरुरत पड़ती है उस खजाने तक पहुचाने वाले एक अनुभवी मार्गदर्शक की जो बिना किसी कष्ट नुकसान के खजाने के द्वार खोलने की तरकीब जानता हो। 

          फिर तो सारे अरमान पूरे किए जा सकते हैं। दुनिया में एक हस्ती बना जा सकता है। खोए हुए वस्तु या व्यक्तियों का पता लगाया जा सकता है। स्मरण शक्ति में भारी वृद्धि की जा सकती है। भुत-भविष्य के ज्ञाता बना जा सकता है। बीमारियों का सफल इलाज किया जा सकता है। किसी को भी सम्मोहित किया जा सकता है। किसी से भी अपनी बात मानवाई जा सकती है। परिवार के सदस्यों को नेक और विचारवान बनाया जा सकता है। गलत प्रवृति में फंसे लोगों को सुधारा जा सकता है। अपने मिलने वालों में विशिष्ट बना जा सकता है। वासना और क्रोध पर पूर्ण नियंत्रण प्राप्त किया जा सकता है। 

          सभी तरह के पुरुष और स्त्रियों के दिलों पर शासन किया जा सकता है। ऐसी उपलब्धि होने पर जीवन की अनेक समस्याएं तो यूँ ही ख़त्म हो जाती है। सम्मोहन के विषय पर आज सम्पूर्ण विश्व सक्रीय और चिंतनशील है। दुनिया के कई देशों में सम्मोहन विज्ञान पर नित नए शोध किये जा रहे हैं। अमेरिका के मेडिकल कॉलेज में तो बाकायदा सम्मोहन द्वारा रोगियों का इलाज चल रहा है। अतः सम्मोहन तरंगों के खजाने की फाटक को खोलने के लिए शास्त्रों में विभिन्न उपाय दिए गए हैं जिनमें शरीर में स्थित इन्द्रियों और कुंडलिनी चक्रों का श्रेष्ठ महत्व बताया गया है। 

          हमारे शरीर में कुछ कुंडलिनी चक्र है जो क्रमशः मूलाधार (सुषुम्ना), स्वाधिष्ठान, मणिपुर, अनाहत, विशुद्ध, आज्ञा चक्र के साथ सह्श्रार के नाम से जाने जाते है। सभी चक्रों का अपना-अपना महत्व है।  इस पेज में हम सिर्फ सुषुम्ना यानि मूलाधार चक्र के बारे में चर्चा कर रहे हैं। अर्थात कोई भी पुरुष स्त्री, युवक युवती, सही मार्ग निर्देशन में मूलाधार चक्र का ध्यान करके अद्भुत सम्मोहक व्यक्तित्व बन सकता है इसमें कोई संदेह नहीं। संदेह इसलिए नहीं क्योंकि सब कुछ पोजेटिव सोंच से संभव होता है। जैसे ही आप मन से नकारात्मक भाव हटाते हैं, आप सफल होते जाते हैं।  

          शरीर में स्थित सुषुम्ना कुंडलिनी चक्र नाभि से नीचे सुप्त अवस्था में पड़ी होती है जिसे कुछ प्रेक्टिकल अभ्यास विधियों द्वारा जागृत एवं चैतन्य किया जाता है। जब यह जागृत होने लगती है तब क्रोध और कामवासना पर नियंत्रण होने लगता है। इस चक्र के जागृत होते ही सम्पूर्ण शरीर दिव्य आनंद से खिल उठता है। आपके इर्द-गिर्द आकर्षण की अदृश्य तरंगें प्रवाहित होने लगती है। इन अदृश्य तरंगों के संपर्क में आने वाला हर पुरुष स्त्री, जिव जंतु, पशु पक्षि पक्षी स्वतः सम्मोहित होने लगते हैं। यह वैज्ञानिक शोध भी है। हर किसी के साथ नित्य दिनचर्या में जाने अनजाने  होता रहता है। अतः ऐसे शक्ति पुर्ण ज्ञान होना ही सौभाग्य कहा जाएगा।     

            आप जो भी विचार, आज्ञा , सन्देश किसी को देते हैं तो उसे ह्रदय से स्वीकार किया ही जाता है। अब तो पश्चिम के वैज्ञानिकों के प्रयोगों ने सिद्ध कर दिया है कि, सम्मोहन की ऐसी विदुतिय शक्ति सभी पुरुष स्त्रियों में होता ही है जिसका समुचित मार्गदर्शन प्राप्तकर जीवन में सम्मोहन उर्जा भरकर आलौकिक बनना चाहिए। सुषुम्ना चक्र को जागृत करने की कई विद्धिया है। तिब्बत में सुषुम्ना चक्र पर विशेष तरीके से सुइयां चुभोकर जागृत किया जाता है तो कही बिजली के झटके से जागृत किया जाता है। किन्तु ये सभी विधियाँ असुविधाजनक होने कारण कष्टदायक भी होती है। अतः भारतीय प्रणाली सर्व श्रेष्ठ उपाय माना जाता है। 

          भारतीय प्रणाली अथवा भारतीय ज्ञान के अनुसार शरीर के किसी  अंग या चक्र पर विशेष रिति से ध्यान को एकाग्र किया जाय तो वह अंग या चक्र सक्रिय यानी चैतन्य होने लगता है। ध्यान एकाग्र के समय निम्न मंत्र का भी उच्चारण किया जाय तो शीघ्रता से काम बनता है। ॐ क्लीं क्लीं क्रीं क्रीं हुं हुं फट। आप इस मंत्र का सोते जागते उठते बैठते जितना अधिक उच्चारण करेंगे सुषुम्ना जागरण में शीघ्रता आएगी।  इस मंत्र के उच्चारण का प्रभाव  सीधा आपके सुषुम्ना चक्र पर ही पड़ता है। जैसे जैसे सुषुम्ना जागृत होती है वैसे वैसे पूरे शरीर में सम्मोहन उर्जा वलिष्ट होती जाती है। 

           सम्पूर्ण शरीर सम्मोहक बन उठता है। नेत्रों में विशेष प्रकार की चुम्बक प्रवाहित होने लगती है जो वायु मंडल में फैलकर सभी प्राणियों पर इच्छानुकूल प्रभाव डालती रहती है। अतः हमें किसी प्रकार अपने सुषुम्ना चक्र को जागृत कर ही लेनी चाहिए। इसमें उपरोक्त मंत्र आवश्यक मंत्र है परन्तु अभ्यास के लिए जो व्यवस्था है। वह पाठकों और शुभचिंतकों के लिए अभ्यास सामग्री पैकेट कोरियर अथवा रजि डाक से भेजने की व्यवस्था है जिन्हें सम्मोहन की दुनिया में प्रवेश करना हो वह हमारे नंबर पर अपना नाम पता मैसेज कर दें अन्य जानकारी फोन से प्राप्त करें।

नोट- यह आपार हर्ष का विषय है कि, हमने अपने पूर्व सूचना के मुताबिक त्राटक ज्ञान के साथ सम्मोहन, वशीकरण, कुंडलिनी जागरण का 30 से 45 दिनों का विशेष कोर्स जारी कर दिया है। इस दुर्लभ त्राटक सम्मोहन कोर्स को अनेक प्रांतों के भाई बंधु और शुभचिंतक लगन पूर्वक कर रहे हैं। अतः मंगल कामना हैं इनकी सफलता के लिए तथा आपके लिए हार्दिक कामना है आपके आगमन के लिए। क्योंकि आप दुनिया से बहुत कुछ हासिल कर सकते हैं परन्तु ऐसा अद्भुत और दुर्लभ ज्ञान कहीं और से प्राप्त करना बहुत ही कठिन है। नामुमकिन भी मान लीजिये। इस सम्बन्ध में किसी भी जानकारी के लिएआप बेहिचक हमें फोन कर सकते हैं। आपको हमारा भरपूर सहयोग प्राप्त होगा, भरोसा रखें।    
                                                           
आप दुनिया को हैरत में डालने वाला सम्मोहन शिक्षा प्राप्त करना चाह्ते हैं तो हमारे नम्बर पर फ़ोन कर सकते हैं. 9565120423 - अशोक भैया, गोरखपुर, ऋषिकेश, हरिद्वार, दिल्ली, इसी के साथ - मंगल कामनाओं सहित- अशोक भैया 

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                                  - अशोक भैया  - 9565120423 (ऋषिकेश, दिल्ली, हरिद्वार, लखनऊ, गोरखपुर)