Wednesday, 3 July 2013

सोना बनाना सहज सम्भव है.

           

            सोना बनाने का रहस्य 


          यह सौभाग्य की बात है कि, आज आपको नेट के जरिए सोना बनाने का आसान रहस्य बताया जा रहा है. इसके आधार पर कोई भी व्यक्ति विभिन्न सामग्रियां जुटाकर, पूरे आत्मविश्वास के साथ अपनी हाथों से जितना चाहें शुद्ध सोने का निर्माण अपने घर में ही कर सकता है. 
          
          दुनिया में कुछ भी नामुमकिन नहीं है. नामुमकिन उनके लिए है जो हाथ पर हाथ धरे बैठे रहते हैं. या जो बड़े-बड़े ख्वाब देखते रहते हैं तथा ख्याली पुलाव के बारे में सोंचते रहते है. किन्तु आज मैं स्वर्ण निर्माण की चर्चा भी कर रहा हूँ और बनाने की तकनीक भी समझा रहा हूँ. आप थोड़ा हैरान, थोड़ा उत्सुक जरुर हो सकते हैं परन्तु यह हैरान होने का विषय नहीं है. बस आप इसे पहले ध्यान से समझ लें .  
          
          आज भी कई ऐसे नाम गिनाए जा सकते हैं जो पूर्वकाल में स्वर्ण निर्माण के क्षेत्र में विख्यात रहे है.  इनके नाम क्रमसः इस प्रकार से है. प्रभु देवा जी, व्यलाचार्य जी, इन्द्रधुम जी, रत्न्घोष जी इत्यादि स्वर्ण विज्ञान के सिद्ध योगी रहे हैं.  अपने आप में ये पारद सिद्ध योगी माने जाते रहे हैं. प्राचीन ग्रंथों में स्पष्ट चर्चा है. किन्तु भारतीय एक नाम है नागार्जुन का, जो स्वर्ण विज्ञानी के रूप विख्यात रहे है.  
          
          आज भी भारत वर्ष के सुदूर प्रान्तों में. इसके जानकार योगी, साधक हो सकते हैं जो सोना बनाने का दुर्लभ ज्ञान रखते हैं. ऐसे ही नामों में अद्भुत और पवित्र एक नाम है, पूज्य श्री नारायण दत्त श्रीमाली जी . जो १३  जुलाई  सन् १९९८  को इच्छा मृत्यु प्राप्तकर सिधाश्रम प्रस्थान कर गये. किन्तु अपने पीछे अनेक दीपक रोशन कर  छोड़ गए हैं, जो जहाँ भी है समाज कल्याण करने में  सक्षम और निरंतर कार्यशील है. 
          
          जैसाकि विभिन्न विधियों से स्वर्ण निर्माण की चर्चा होती आई है तथा पूर्व समय में कई रसाचार्यों ने समाज के सामने सोने का निर्माण करके चकित कर दिया. ६ नवम्बर सन १९८३ ई० साप्ताहिक हिंदुस्तान के अनुसार  सन १९४२ ई० में पंजाब के कृष्णपाल शर्मा ने ऋषिकेश में मात्र ४५  मिनट में पारा से दो सौ तोला सोने का निर्माण करके सबको आश्चर्य में डाल दिए. उस समय वह सोना ७५ हजार रूपए में बिका, वह धनराशि दान कर दी गई. 
          
          उस समय वहां महात्मा गाँधी, उनके सचिव श्री महादेव देसाईं, तथा श्री युगल किशोर बिड़ला जी उपस्थित थे. इससे पहले २६ मई सन १९४० में भी कृष्णपाल शर्मा ने दिल्ली के बिड़ला हॉउस में पारे को शुद्ध  सोने में बदलकर दिखा दिया था. उस समय भी वहा विशिष्ट गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे. और आज भी इस घटना का उल्लेख बिडला मंदिर में लगे शिलालेख पर मिलता है. 
   
         नागार्जुन का नाम तो स्वर्ण विज्ञानी के रूप में खासा प्रसिद्ध रहा है. उन्हें तो पारा से सोना बनाने में महारत हासिल थी. उनके लिखे कई महत्वपूर्ण ग्रन्थ मौजूद है. जिनका अध्ययन करके पारे के दवारा अपनी हाथों से सोना कोई भी बना सकता है. नागार्जुन एक अति विशिष्ट व्यक्तित्व रहे हैं, नागार्जुन के जीवन  की  संघर्ष कथा किसी अगले पोस्ट में जरुर दूंगा.    
    
         अब मैं स्वर्ण निर्माण के चर्चे पर आता हूँ जिसे सिख समझकर आप भी उत्साहपूर्वक अपनी हाथों से सोना बनाएं. यह विधि त्रिधातु पात्र विधि कही जाती है. इसके लिए तीन अलग अलग धातुओं को मिलाकर पहले एक कटोरानुमा बर्तन तैयार किया जाता है.  इस बर्तन को स्वर्ण पात्र भी कहते है. 

निर्माण विधि -
      
          अर्थात लोहा 500 ग्राम, पीतल 500 ग्राम, और कांसा 500 ग्राम, तीनों धातु शुद्ध हो, सही हो ध्यान रखें. तीनों धातुओं को अलग-अलग पिघलाएं तथा पिघल जाने पर उन्हें आपस में मिक्स करते हुए किसी कटोरे या कढाई का रूप दे दें. ध्यान रहे उस बर्तन में कहीं छेद न हो और मात्रा सही हो. ऐसा बरतन बनाने में दिक्कत हो तो किसी बनाने वाले से बनवा लें. बरतन बन जाने के बाद उसे रख लें और बाजार में किसी विश्वसनीय पंसारी की दुकान से 200 ग्राम गंधक, 200 ग्राम नीला थोथा (तुतिया),  200 ग्राम नमक और 200 ग्राम कुमकुम (रोली) तथा रससिंदूर खरीदें साथ ही विश्वसनीय स्थान से ही 100 ग्राम शुद्ध पारा और शहद खरीद लें. ध्यान रहे- गंधक को सभी जानते हैं . नीला थोथा जिसे तुतिया भी कहते हैं .यह नीले रंग में पूरी तरह जहर होता है . 
          
          अब सभी सामग्रियां इकट्ठी करके गंधक, नीला थोथा, नमक और रोली अलग अलग कूट-पीसकर आपस में मिलादें और एक किलो ताजे पानी में इसे घोल दें. इसके बाद चूल्हे या स्टोव पर आग जलाए और त्रिधातु बर्तन में गंधक, नीला थोथा, नमक और रोली वाले मिश्रण को डालकर धीमी आंच पर पकने दें. जब पानी उबलने लगे तो 100 ग्राम पारा को रससिंदूर में अच्छी तरह घोंटे. फिर उसकी गोली बनायें और उसके ऊपर शहद चिपोड़ दें. अब उसे खौलते पानी (सामग्रियों) के बीच धीरे से रखें. जब दो तिहाई भाग पानी जल जाए तो बीच में पक रहे गोले पर ध्यान दिए रहें जो हल्का-हल्का सुनहलापन होना शुरू होगा. जब वह पूरी तरह सुनहला दिखने लगे तब बर्तन को नीचे उतार लें. आपके परिश्रम की बदौलत शुद्ध सोने का निर्माण हो चुका होगा,  श्रद्धा पूर्वक उसका नमन करे.  

सावधानियां -

१- नीला थोथा शुद्ध रूप से जहर है, इसे छुने के बाद हर बार हाथ धो लिया करें. 
२- गंधक भी कुछ इसी प्रकार का पदार्थ होता है, छुने के बाद हाथ धोलें .
३- पारा अति चंचल द्रव्य होता है, जमीन पर उसे गिरने से बचाएं.
४- सामग्री पकाते समय आँखों को किसी विशेष चश्मे से ढका हुआ रखें.

          इस प्रकार सामग्री की शुद्धता और सावधानियों को ध्यान में रखकर पारद यानी पारा के द्वारा स्वर्ण बनाया जाता है. आप पूरे आत्मविश्वास के साथ सोने का निर्माण कर सकते हैं. हमारी मंगल कामना आपके साथ है. 

          भारत वर्ष का सौभाग्य है कि, यहाँ एक दो नहीं, स्वर्ण बनाने की अनेकों विधियाँ पूर्व संयोजित है. संतों और ऋषियों की कृपा ही है जो अनमोल थाती के रूप में इस देश को सौंप गए हैं तथा ऐसे दिव्य ज्ञान प्राप्त करके भी कोई गरीबी और निर्धनता का रोना रोए तो इसे महा दुर्भाग्य ही माना जाएगा.
          इस लेख के पाठकों को सलाह है,- प्रस्तुत स्वर्ण निर्माण विधि प्रमाणिक विधि है. स्वर्ण निर्माण में रूचि लेने वाले बंधुओं को निर्देश का पालन करते हुए प्रयोग करना चहिये. सामग्रियां शुद्ध व् सही  हो. निर्माण विधि और निर्माण समय भी महत्व रखता है. यदि पहली बार में सफलता न मिले तो कहीं न कहीं त्रुटी जरुर मानिये. आप दूसरी बार  प्रयास कीजिये, तीसरी बार कीजये. क्योंकि जो सच है उसे प्रकट होना ही है. विश्व विख्यात स्वर्ण विज्ञानी नागार्जुन १७ वर्ष की उम्र में ही घर परिवार के मोह बंधन से निकलकर स्वर्ण निर्माण शोध में निमग्न हो गए थे. उनके सामने सुविधाएँ भी कम थी और समस्ययाओं का ताँता होता था.उन्हें सफलता ७० साल की उम्र में प्राप्त हुई. अतः आत्मविश्वास भरा प्रयास व्यक्ति को सफल बनाता है.   
                                    
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                 अशोक श्री -9565120423 Rishikesh, Delhi,  ballia
नोट- यह आपार हर्ष का विषय है कि, हमने अपने पूर्व सूचना के मुताबिक त्राटक ज्ञान के साथ सम्मोहन, वशीकरण, कुंडलिनी जागरण का 35 दिनों का विशेष  कोर्स जारी कर दिया है। इस दुर्लभ त्राटक सम्मोहन कोर्स को अनेक प्रांतों के भाई बंधु और शुभचिंतक लगन पूर्वक कर रहे हैं। अतः मंगल कामना हैं इनकी सफलता के लिए तथा आपके लिए हार्दिक कामना है आपके आगमन के लिए। क्योंकि आप दुनिया से बहुत कुछ हासिल कर सकते हैं परन्तु ऐसा अद्भुत और दुर्लभ ज्ञान कहीं और से प्राप्त करना बहुत ही कठिन है। नामुमकिन भी मान लीजिये। इस सम्बन्ध में किसी भी जानकारी के लिएआप बेहिचक हमें फोन कर सकते हैं। आपको हमारा भरपूर सहयोग प्राप्त होगा, भरोसा रखें।    

किसी भी जानकारी के लिए फोन करें या व्हाट्सएप पर मैसेज करें। आपका सहयोग किया जाएगा।   - धन्यवाद।
                                                          


           

Tuesday, 2 July 2013

स्वर्ण निर्माण



       सोना बनाएं मौज मनाएं 

                (असंभव कहीं कुछ नही)


          जीवन में समस्याओं की कमी नहीं है। किन्तु समस्याओं से मुक्ति का समाधान भी ईश्वर ने सभी मनुष्यों को दे रखी है। वैसे देखा जाये तो आज के युग में समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए धन की सख्त आवश्यकता है। कदम-कदम पर बात-बात में धन की जरुरत, धन का आभाव ही समस्याओं का प्रमुख कारण है।

          अतः यह जीवन धन से लबालब होना अनिवार्य है। इसके लिए महाप्रयत्न करना पड़ता है। विभिन्न स्थितियों से गुजरना पड़ता है। बुद्धि का प्रयोग करते हुए अथक मेहनत करने पड़ते हैं। फिर भी 99% खोदा पहाड़ निकली चुहिया जैसी बात होती है। होना तो यह चाहिए कि कुछ ऐसा करिश्मा हो ताकि  जो देखे सन्न रह जाए,  देखे और  सोंचता रह जाय। अर्थात आपको लक्ष्मी का प्रत्यक्ष आशीर्वाद प्राप्त हो जाय।

          लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए ग्रंथों में अनेकों विधियां और कई-कई उपाय दिए गए हैं। वो सभी अपने आपमें सही और श्रेष्ठ है। किन्तु मैं यहाँ स्वर्ण निर्माण पर एक छोटी सी चर्चा कर रहा हूँ। क्योंकि जीवन में धन की आवश्यकता है। और थोड़े-मोड़े रूपए से कुछ नहीं होने वाला, आज बड़े शहरों में, बड़े लोगों में लाख रूपए की कोई अहमियत नहीं है। हाँ, करोड़पत्तिओं की थोड़ी इज्जत जरुर है। फिर इधर कोई कितना प्रयास करेगा धन प्राप्ति और धन संचय के लिए। इसके लिए तो लक्ष्मी और कुबेर का आशीर्वाद ही आपकी मनोकामना पूरी कर सकता है। 

          और मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ। आपको शीघ्र ही भगवती लक्ष्मी और कुबेर जी का आशीर्वाद प्राप्त होने वाला है। क्योंकि आपको अपने क्षेत्र  का विशिष्ट व्यक्ति बनना है। किन्तु लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए मन साफ़ होना चाहिए, उस मन में अगाध विश्वास होना चाहिए। थोड़ा भी संदेह से समय खो जाता है। कई बार हमारा कुतर्की सोंच भी ऐसे समय से हाथ धो बैठता है। वैसे भी आदमी जब अपने जीवन में काफी तरह से असफल हुआ रहता है तो उसका भगवान पर से भी भरोसा उठ जाता है। 

          जबकि यह तर्क संगति बिलकुल नहीं है। लोग किस्मत और भगवान की बात करते हैं। मैं कर्म और सद्द्विचार की बात करता हूँ। इसी कारण किस्मत के भरोसे जीने वाले लोगों से मेरी कोई दिलचस्पी नहीं होती। यदि आपमें अच्छी सोंच है, बड़े सपने हैं और जीवन में कुछ कर दिखाने के जज्बे और इक्छा शक्ति है, दुनिया भर में लोगों को चैलेन्ज ठोंकना है तो वे लोग ही हमारे ब्लॉग को पढ़े और साफ़ ह्रदय होकर निरंतर संपर्क में बने रहें। हमारा फोन न. आपको उपहार तुल्य है। आप कभी भी संपर्क स्थापित कर सकते हैं।    
       क्योंकि अब रोना धोना नहीं है, अब सही ढंग से कुछ कर दिखाना है। यह मेरी ओर से विश्वसनीय दावा है आपको। लक्ष्मी का आशीर्वाद पाने, जीवन को सफल सुखद बनाने का मार्ग दिखाते हुए मेरा पूरा-पूरा सहयोग आपको मिलता रहेगा निश्चिन्त रहिए। (इस ब्लॉग से पूर्व हमने एक ब्लॉग पोस्ट किया है सोना बनाने का रहस्य) उसे पढ़ लें। मेरे शोध में कई और प्रकार की व्यवस्थाएं है। धनप्राप्ति या लक्ष्मी आगमन के लिए अनेक उपक्रम हैं जो काफी सहज सुगम और सुखद होगा।

नोट- यह आपार हर्ष का विषय है कि, हमने अपने पूर्व सूचना के मुताबिक त्राटक ज्ञान के साथ सम्मोहन, वशीकरण, कुंडलिनी जागरण का 30 से 45 दिनों का विशेष कोर्स जारी कर दिया है। इस दुर्लभ त्राटक सम्मोहन कोर्स को अनेक प्रांतों के भाई बंधु और शुभचिंतक लगन पूर्वक कर रहे हैं। अतः मंगल कामना हैं इनकी सफलता के लिए तथा आपके लिए हार्दिक कामना है आपके आगमन के लिए। क्योंकि आप दुनिया से बहुत कुछ हासिल कर सकते हैं परन्तु ऐसा अद्भुत और दुर्लभ ज्ञान कहीं और से प्राप्त करना बहुत ही कठिन है। नामुमकिन भी मान लीजिये। इस सम्बन्ध में किसी भी जानकारी के लिएआप बेहिचक हमें फोन कर सकते हैं। आपको हमारा भरपूर सहयोग प्राप्त होगा, भरोसा रखें।    
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मेरे कुछ दुर्लभ आगामी ब्लोग्स जो पोस्ट होने वाले है, उनके शीर्षक हैं।
१- घर बैठे सम्मोहन सीखें।
२- वास्तु दोष मुक्ति संभव।
३- तरक्की का तरीका।
४- लड़कियों का सुरक्षा कवच।
५- महिलाओं को पति वशीकरण का वरदान।
६ सम्मोहन तिलक का अदभुत रहस्य।
७- फोटो सम्मोहन की सहज विधि।
८- असाध्य विमारियों का रामवाण इलाज।
९- राजनितिक सफलता यूँ पाई जाती है।
१०- स्वप्न विज्ञान दिलचस्प ज्ञान।  
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                                                                                                अशोक भैया
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Monday, 1 July 2013

आज्ञाचक्र यूँ जागृत होता है



       आज्ञा चक्र से भुत भविष्य का ज्ञान

           (जीवन को सौन्दर्यवान बनाएं)

          मनुष्य का शरीर शक्तियों का गोदाम है। यह एक पावर  प्लांट है। इस पावर प्लांट या पावर हॉउस को समझना बहुत जरुरी है ताकि इसका भरपूर लाभ उठाया जा सके। यूँ तो पूरे शरीर में जितनी कुंडलिनी चक्र है, उनमें आज्ञाचक्र भी एक नाम आता है। यह चक्र मस्तक पर , दोनों भौहों के मध्य में विराजमान है, जहाँ सभी  लोग बिंदी या तिलक लगाया करते हैं।
         
,          आज्ञा चक्र के साधक सदा निरोग, सम्मोहक और त्रिकालदर्शी माने जाते हैं। कुंडलिनी के इसी आज्ञा चक्र को योग साधनाओं दवारा जागृत करके, किसी भी स्त्री /पुरुष का भुत भविष्य देखा जा सकता है। वर्तमान/तत्काल वह क्या सोंच रहा है, यह आसानी से पता लगाया जा सकता है। चुकि पूरे शरीर में स्थित, लौह तत्व की अधिकांश मात्रा,  आज्ञा चक्र पर ही स्थित होता है इस कारण चुम्बकीय प्रभाव भी यही से  होता है।  
          
          अतः जब इस चक्र का हम ध्यान करते हैं, तो हमारे शरीर में एक विशेष चुम्बकीय उर्जा का निर्माण होने लगता है, उस उर्जा से हमारे अन्दर के दुर्गुण ख़त्म होकर, आपार एकाग्रता की प्राप्ति होने लगती है। विचारों में दृढ़ता और दृष्टि में चमक पैदा होने लगती है। तत्पश्चात जब कहीं भी अपनी दृष्टि जाती है तो वहां के बारे में, या उसके बारे में अंतर्रुपी ढंग से ज्ञान-अनुभव होने लगता है कि, सच्चाई क्या है। आज के युग में तो ऐसी साधना हर किसी को करनी ही चाहिए ताकि सामने वाले पुरुष या स्त्री के मन में क्या है बिना बताये पता लग जाय. 

          आपके प्रति उसके अन्दर कैसी भावना है। वह आपके लिए नुकसानदायक है या फायदेमंद। ये सब कुछ जानकारी मिल जाती है और यह जीवन की बहुत बड़ी उपलब्धि होगी, जब आप अपने आज्ञाचक्र को जागृत करने का प्रयत्न करेंगे। सौभाग्य से आपकी आज्ञाचक्र जागृत हो जाता है, तब दुनिया में आपके लिए कुछ भी असंभव नहीं रह जाता है, यह हमारा दावा है। यदि आज्ञाचक्र थोड़ा भी जागृत हुआ तो बेशक आपके लिए वह धारदार शस्त्र का काम करेगा तथा समाज कल्याण के लिए बहुत कुछ कर सकेंगे आप।

          क्योंकि ……. ..............इसके जागरण से पूरा शरीर सम्मोहन की उर्जा से आप्लावित हो जाता है, जिससे किसी विमार व्यक्ति को स्पर्श करके ही रोग मुक्त कर सकते हैं। किसी अपराधी प्रवृति के युवक या युवती की गलत सोंच को ख़त्म कर उसे सही राह पर लाया जा सकता है। रात दिन तनाव में रहने वाले व्यक्ति को माइण्ड फ्री और फ्रेस बनाया जा सकता है। किसी की उलझी हुई गुथियों को सुलझाया जा सकता है। नशा पान करने वालों को पूर्ण स्वस्थ किया जा सकता है। 

          अतःआज्ञा चक्र जागृत कर एक अच्छा भविष्यवक्ता बनकर, समाज में आप अलग स्टेट्स बन सकते हैं। क्योंकि एकाग्रता आपके अन्दर भ्रमण करती रहती है। आज्ञाचक्र जागृत करने के लिए विधिवत प्रशिक्षित होना आवश्यक है। यह आप किसी अनुभवी के सानिध्य बैठकर या जैसी भी सिविधा मिले, इसका ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं, अथवा विश्वसनीय रूप से आपको कहीं से भी आज्ञाचक्र जागृत करने की सुविधा प्राप्त हो तो, देर न करिये, किसी तरह से इस ज्ञान को हासिल कर ही लीजिये, आपका और पूरे समाज और राष्ट्र का कल्याण ही कल्याण होगा। 

 यदि आप इस सम्बन्ध में रूचि रखते हैं तो हमसे विचार विमर्श कर सकते हैं।  आपको हमारा मार्गदर्शन सहयोग निश्चित रूप से प्राप्त होगा।  
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नोट- यह आपार हर्ष का विषय है कि, हमने अपने पूर्व सूचना के मुताबिक, घर बैठे ही, त्राटक ज्ञान के साथ सम्मोहन, वशीकरण, और कुंडलिनी चक्र जागरण के लिए 30 से 45 दिनों का विशेष कोर्स जारी कर दिया है।यह दुर्लभ कोर्स साधना को अनेक प्रांतों के भाई बंधु और शुभचिंतक लगन पूर्वक कर रहे हैं। 
      अतः मंगलकामना हैं इनकी सफलता के लिए तथा आपके लिए हार्दिक कामना है, आपके आगमन के लिए। क्योंकि आप दुनिया से बहुत कुछ हासिल कर सकते हैं, परन्तु ऐसा अद्भुत और दुर्लभ ज्ञान प्राप्त करना ही बहुत कठिन है। नामुमकिन भी मान लीजिये। इस सम्बन्ध में किसी भी जानकारी के लिए आप बेहिचक हमें फोन कर सकते हैं। आपको हमारा भरपूर सहयोग प्राप्त होगा, भरोसा रखिये।    
किसी भी जानकारी के लिए फोन करें या व्हाट्सएप पर मैसेज करें। आपका सहयोग किया जाएगा।   अशोक भैया  9565120423
                       
          

Sunday, 30 June 2013

सम्मोहन वशीकरण की माया



       सम्मोहन वशीकरण यंत्रम 


          सम्मोहन वशीकरण का तात्पर्य यह है कि, इसका विधि पूर्वक प्रयोग कर किसी भी व्यक्ति के चंचल  मन को अपने कंट्रोल में कर लेना और उसे अपने आदेशों पर संचालित करना। प्राचीन शास्त्र ग्रन्थों में इसके लिए दर्जनों उपाय सार्वजानिक किए गए हैं। इसका पूरा पूरा लाभ जन-समाज ने उठाया भी और लगातार उठाया जा रहा है। 
          
        आज मैं इसी विषय पर अति सहज रूप से एक शक्तिशाली प्रयोग बता रहा हूँ । इसका विधिवत प्रयोग कर कोई भी पुरुष स्त्री अपनी पोजेटिव कामना के लिए शत-प्रतिशत लाभ उठा सकते हैं। अतः इस प्रयोग के लिए कहीं से ग्रहण काल में सिद्ध किया शुद्ध वशीकरण यन्त्र और शुद्ध स्फटिक माला की व्यवस्था कर लें। 
          
         अब शुक्रवार के दिन प्रातःकाल स्नान करके शांत-एकांत कमरे में पूर्व उत्तर दिशा की ओर मुंह करके सुखासन में बैठ जायं। अपने सामने कोई वस्त्र विछा दें। उस वस्त्र पर जल से नहलाकर वशीकरण यन्त्र और स्फटिक माला रखें। यन्त्र और माला का धूप बत्ती से सामान्य पूजन करें तथा इच्छित पुरुष या स्त्री का चेहरा मस्तिष्क में लाते हुए स्फटिक माला से निम्न मंत्र का तीन  माला उच्चारण करें।

मंत्र -  ॐ ऐं ऐं  (अमुक) वश्यमानाय मम आज्ञा परिपालय  ऐं ऐं फट। 
                                    ( अमुक की जगह व्यक्ति का नाम लें )

          यूँ की मंत्र उच्चारण शुद्धता और एकाग्रता के साथ हो तो शत- प्रतिशत प्रभाव पड़ता ही है और इसका परिणाम भी शीघ्र देखने को मिलता है। मंत्र जाप के बाद माला गले में धारण कर लें और यन्त्र कहीं सुरक्षित तब तक रखें जब तक की कामना पूरी न हो जाये। अब प्रयत्न यह करे कि, उक्त पुरुष या स्त्री किसी भी बहाने आपके सामने पड़े। यदि दूर हो तो आप पूरी इच्छाशक्ति और आत्मविश्वास से विचार बनाएं कि वह जहाँ भी हो, आपको फोन करे और जल्दी करे। बाद में यन्त्र को किसी बहती नदी में बहा दें। 
          
       यह आजमाया हुआ प्रयोग है। इस प्रयोग से पत्थर दिल भी मोम की तरह बनने लगते हैं। दरअसल ऐसे प्रयोग कभी भी व्यर्थ नहीं होते। यह निश्चित ही पूर्ण सफलता प्रदायक होता है। आप निश्चित होकर इसे करें। जैसाकि यह सम्मोहन वशीकरण प्रयोग है, किसी को भी अपने कंट्रोल में लेकर उससे अपनी  इच्छा मनवाना। अपने हर आदेश पर उसे संचालित किए रहना। परन्तु ऐसे प्रयोग कभी भी स्वार्थ या किसी की अहित के लिए न करें, यह शास्त्रिय हिदायत है। स्वच्छ मन से करें। इसका जीवन में अधिक से अधिक लाभ उठाएं। 
          
        इस प्रयोग से आपके अन्दर सकारात्मक उर्जा बनती है जो स्वतः ही आपके मार्ग की वाधाए ख़त्म करती जाती है। इसके प्रयोग से आपको दैवीय सौंदर्य की प्राप्ति होती है। एक दिन ऐसा आता है जब आप, जिसके भी बारे में सोंचते है वह व्यक्ति पुरुष हो या स्त्री आपसे मिलने, आपसे बात करने को लालायित रहते हैं। अधिक से अधिक समय तक आपके साथ गुजारने के लिए मन बनाए रहते हैं। 

(इस प्रयोग को करें। आप निश्चित सफल होंगे। किसी भी प्रकार की अन्य जानकारी लेनी हो तो हमारे नंबर पर फोन करके ले सकते हैं) 

अगले सप्ताह तक हम अपनी संस्थान से एक दुर्लभ और शक्तिशाली महा वशीकरण सिद्ध कवच   का निर्माण करने जा रहे हैं। इसे सिर्फ और सिर्फ गले में धारण कर लेने से ही उपरोक्त लाभ संभव हो सकेगा। अतः जो भाई बहन मंत्र उच्चारण आदि नहीं कर पाए, वह इस कवच को धारण करके लाभान्वित हो सकते है।) 
नोट- यह आपार हर्ष का विषय है कि, हमने अपने पूर्व सूचना के मुताबिक त्राटक ज्ञान के साथ सम्मोहन, वशीकरण, कुंडलिनी जागरण का 30 से 45 दिनों का विशेष कोर्स जारी कर दिया है। इस दुर्लभ त्राटक सम्मोहन कोर्स को अनेक प्रांतों के भाई बंधु और शुभचिंतक लगन पूर्वक कर रहे हैं। अतः मंगल कामना हैं इनकी सफलता के लिए तथा आपके लिए हार्दिक कामना है आपके आगमन के लिए। क्योंकि आप दुनिया से बहुत कुछ हासिल कर सकते हैं परन्तु ऐसा अद्भुत और दुर्लभ ज्ञान कहीं और से प्राप्त करना बहुत ही कठिन है। नामुमकिन भी मान लीजिये। इस सम्बन्ध में किसी भी जानकारी के लिएआप बेहिचक हमें फोन कर सकते हैं। आपको हमारा भरपूर सहयोग प्राप्त होगा, भरोसा रखें।        
                                           
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किसी भी जानकारी के लिए फोन करें या व्हाट्सएप पर मैसेज करें। आपका सहयोग किया जाएगा।   - धन्यवाद।
                                                                                   
                         

Saturday, 29 June 2013

अब आप भी सोना बना सकते है

         
         सोना बनाने का रहस्य 


          यह सौभाग्य की बात है कि  आज नेट सुविधा के कारण  आपको सोना बनाने की अद्भुत जानकारी बहुत ही सहज रूप से दे रहा हूँ। इसके अनुसार कोई भी व्यक्ति विभिन्न सामग्री  इकट्ठी करके अपने आत्मविश्वाश के योगदान से अपनी हाथों से सोने का निर्माण कर सकता है। क्योंकि दुनिया में कुछ भी असंभव नहीं है। असंभव उनके लिए है जो हाथ पर हाथ धरे बैठे रहते है, उनके लिए है जो ख्याली पुलाव बनाते रहते है। किन्तु आज मैं स्वर्ण निर्माण की चर्चा कर ही रहा हूँ।    
          
        आप थोड़ा हैरान, थोड़ा आश्चर्य चकित हो सकते हैं। मगर यह हैरान और परेशान होने का विषय बिलकुल ही नहीं है। आज भी कई ऐसे नाम गिनाए जा सकते हैं जो पूर्व काल में स्वर्ण निर्माण के सिद्धहस्त  रहे हैं। तंत्र  मंत्र, सिद्धियों से, पारे से, जड़ी वनस्पत्तियोँ से और रसायनों से सोने का निर्माण करके समाज की आर्थिक व्यवस्था सही कर चुके हैं। इनके नाम इस प्रकार है। प्रभुदेवा जी, व्यलाचार्य जी, इन्द्रधुम जी, रत्न्घोश जी आदि स्वर्ण विज्ञानी के तौर पर प्रसिद्ध रह चुके है। ये अपने आप में पारद सिद्धि पुरुष के रूप में जाने जाते हैं। 
          
          किन्तु एक भारतीय नाम है नागार्जुन की, जिनको समूचा विश्व स्वर्ण विज्ञानी के ही रूप में जानता है। नागार्जुन ने अपने समय में विभिन्न विधिओं से सोने का निर्माण कर पूरी दुनिया को हैरत में डाल दिया। आज भी भारत के सुदूर प्रान्तों में कुछ ज्ञानी जानकार, योगी साधक हो सकते हैं जो सोने का निर्माण करने में सक्षम है, यह तो खोज और शोध की बात है। ऐसे ही नामो में एक प्रसिद्ध नाम है श्री नारायण दत्त श्रीमाली जी, जो 13 जुलाई  सन 1998 ई० को इक्छा मृत्यु प्राप्तकर सिधाश्रम को प्रस्थान कर गए, परन्तु अपने पीछे अनेक दीपक छोड़ गए जो आज समाज कल्याण करने में सक्षम है और गुरु आदेश पर निरंतर कार्यशील हैं।  
          
          जैसाकि विभिन्न विधियों से सोने का निर्माण संभव है तथा पूर्व समय में कई अनुभवी रसाचार्यों ने सोने का निर्माण कर समाज को चकित किया, यह गर्व की ही बात है। 6 नवम्बर सन 1983 साप्ताहिक हिन्दुस्तान के अनुसार सन 1942 में पंजाब के कृष्णपाल शर्मा ने ऋषिकेश में मात्र  45 मिनट में पारा के दवारा दो सौ तोला सोना बनाकर रख दी जो उस समय 75 हजार रूपये में बिका तथा वह धनराशि दान में दे दिया गया। उस समय वहा पर महात्मा गाँधी, उनके सचिव श्री महादेव देसाई, और युगल किशोर बिड़ला आदि उपस्थित थे। इससे पहले 26 मई सन 1940 में भी श्री कृष्णपाल शर्मा ने दिल्ली स्थित बिड़ला हॉउस में पारे को शुद्ध सोने में बदलकर प्रत्यक्ष  दिखा दिया था। उस समय भी वहा विशिष्ट गणमान्य  लोग उपस्थित थे। 
          
           इस घटना का वर्णन बिड़ला मंदिर में लगे शिलालेख से भी मिलता है। इस सिलसिले में नागार्जुन का नाम विख्यात तो है ही, जिन्हें स्वर्ण निर्माण में महारत हासिल थी। उनके लिखे कई महत्वपूर्ण ग्रन्थ मौजूद है। उनका अध्ययन करके साधारण व्यक्ति भी भिन्न-भिन्न विधियों से सोना बनाने की प्रक्रिया समझ सकता है। नागार्जुन की संघर्ष कथा किसी आगामी पोस्ट में जरुर दूंगा। यहाँ मैं स्वर्ण निर्माण की सहज विधि के चर्चे पर आता हूँ। और इस समय मैं सिर्फ एक अत्यंत ही सरल विधि को बता रहा हूँ  यह विधि विश्वसनीय और प्रामाणिक है। इसे त्रिधातु विधि भी कहते हैं। यानी तीन  धातुओं को मिलाकर पहले एक कटोरानुमा बर्तन बनाया जाता है। फिर उसमें शुद्ध पारे सहित भिन्न-भिन्न सामग्री  के सहयोग से स्वर्ण बनाया जाता है। बर्तन की निर्माण विधि इस प्रकार है। 
          
            शुद्ध लोहा 500 ग्राम , शुद्ध पीतल 500 ग्राम और शुद्ध कांसा 500 ग्राम लेकर उसे अलग अलग पिघलाएं। पिघल जाने पर तीनो को मिश्रण करके एक कटोरे या कढाई  का रूप दे दें। ध्यान रहे उस बर्तन में कहीं छेद न हो। तीनो धातु शुद्ध और बराबर मात्रा  में हो। ऐसा बर्तन बनाने में दिक्कत हो तो बनाने वाले से ही बनवाले। बर्तन बन जाने के बाद उसे रख लें और बाजार से किसी विश्वसनीय पंसारी की दुकान से 200 ग्राम गंधक , 200 ग्राम नीला थोथा (तुतिया), 200 ग्राम नमक और 200 कुमकुम (रोली) और रस सिंदूर ख़रीदे। इसी प्रकार विश्वसनीय स्तर पर 100 ग्राम शुद्ध पारा और शहद भी खरीद कर लें। ध्यान रहे, गंधक को सभी लोग जानते हैं। नीला थोथा  जिसे तुतिया भी कहते हैं। यह नीले रंग का होता है, यह पुर्णतः जहर होता है। 
          
            सभी सामग्री इकट्ठी करके गंधक, नीला थोथा, नमक और रोली अलग-अलग कूट पीसकर आपस में मिलादें। अब इसे एक किलो स्वच्छ ताजे पानी में घोल दें। इसके बाद चूल्हा या स्टोव पर आग जलाएं और तीन  धातुओं वाले बने बर्तन में इस घोल को डाले। उसे धीमी आंच पर पकाएं। जब पानी उबलने लगे तो 100 ग्राम पारे को रससिंदूर  में अच्छी तरह से घोटे। पारे का विष निकलकर साफ़ होता जाएगा। उस पारे की गोली बनाएं और उसके ऊपर शहद चिपोड दें। फिर उसे खौलते पानी में सामग्रियों के बीच  धीरे से रख दें।  उसे धीमी आंच पर पकने दें। जब दो तिहाई भाग पानी जल जाए तो पारे के गोले पर ध्यान रखे, वह गोला हल्का हल्का सुनहला होता जाएगा। जब पूरी तरह से सुनहला दिखने लगे तो बर्तन को नीचे  उतार लें। आपके दृढ आत्मविश्वास और परिश्रम से सोने का निर्माण हो चूका रहेगा। अतः उसका श्रद्धा पूर्वक नमन करें।

सावधानी -

1-     नीला थोथा जहर होता है, इसे छूने के बाद हर बार हाथ धो लें। 
2-     गंधक भी कुछ इसी तरह का पदार्थ है। छूने के बाद हाथ धो लें। 
3-     पारा अति चंचल द्रव्य है। इसे जमीं पर गिरने से बचाएं।
4-     सामग्री पकाते समय आँखों को किसी विशेष चश्मे से ढके रखें।

                                                                                                      आपकी सफलता के लिए मंगल कामना !

इस देश का सौभाग्य है कि,  सोना बनाने की यहाँ एक दो नहीं बल्कि संत ऋषियों  की कृपा से अनेक विधिंयां पूर्व संयोजित है। उन विधियों का रहस्य पूरे प्रामाणिकता के साथ आज भी संसार के सम्मुख है। विभिन्न ग्रंथों के अनुसार ऐसे दिव्य ज्ञान प्राप्त होने के बाद भी कोई गरीबी का रोना रोए तो इसे महा दुर्भाग्य ही माना जाएगा।
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Saturday, 16 March 2013

भूत से टक्कर


                              कमरे का भूत 


मैं जो भी कहूँगा सच कहूँगा, सच के सिवाय  कुछ नही. संयोग से मेरी बात गले न उतरे या असत्य सी लगे तो मैं कोई भी सजा भुगतने पर न तो शर्म करूँगा न दुख. 
                                       
                                                     

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क्योंकि सच बोलने का मजा  मै जानता हूँ. झूठ का अनुभव भूल भी गया हूँ. वैसे भी जब मैंने सच को अपनाया तो कईयों से मेरा झगड़ा हो जाता. बाद में मेरी ही जीत होती. मेरे कई जान पहचान के लोग मेरी बातों को ठीक-ठाक और उचित मान लेते है. क्योंकि मैं कभी भी अफवाहों की हवा में नहीं बहता. जो देखता वही कहता हूँ. आप भी अगर ऐसा बनने का इरादा रखते हैं तो आपका स्वागत है. सच की दुनिया ऐसी दुनिया है जहाँ आपका कोई कुछ नही बिगाड़ सकता. 

आज से लगभग ३ साल पहले  मैं यू पी, मऊ के निजामुद्दीनपूरा में फेंगसुई वास्तु दोष निवारण केंद्र का स्टाल लगाया था. मैं अकेला था इसलिए रात में उसी दुकान में सो लिया करता था. भोजन कभी होटल से कर लेता तो कभी किराने की दुकान से चने की सत्तू पैकेट लेकर पानी में घोलता और पी लेता, काम फ़िट. जून जुलाई का महीना था, शाम होते ही बिजली कट जाती तो फिर रात को १ बजे ही आती. इस कारण १० बजे तक अगल बगल परिचय की दुकानों पर टाइम पास कर लेता. 

इधर भोजन के लिए कुछ खाने  पीने  की चीजें, जिसमें चने की सत्तू पैकेट भी होता उसे दुकान में रखता तो वह बंद दुकान से गायब होने लगी. मुझे लगता, दुकान में जो मोटे मोटे, बड़े बड़े चूहें है. उनकी करामात होगी. किन्तु बीसवें दिन रहस्य खुला तो मैं रात में १२ बजकर ३७ मिनट पर अँधेरे में ही दुकान से भाग पड़ा और सीधे मऊ रेलवे स्टेशन पहुचा. स्टेशन का बाहरी भाग सुनसान पड़ा था. एक ठेले पर चाय वाला चाय बना रहा था. मैं वही ब्रेंच पर बैठकर सुबह होने का इंतजार करने लगा. 

हुआ ये था कि बीसवें दिन की  रात में भोजन आदि कर लेने के बाद जमीन पर ही बिछी चटाई पर मैं लेट गया. तब लाईट भी थी और पंखा भी चल रहा था. मैं अपने भाई मनोज (मऊ- घोसी बाबू स्टोर ) के दिए रेडियो पर गाना सुन रहा था. जब नींद आने लगी तो रेडियो बंद कर सो गया. मेरी नींद खुली तब, जब आस-पास से ही किसी के लेट्रिन करने की आवाज आने लगी. लाईट गुल थी, कमरे में अँधेरा था. इस कारण ठीक से कुछ समझ भी नहीं पा रहा था कि क्या हो रहा है.  

मैं बिना कोई हरकत किए चुप  लेटा ही रहा. थोड़ी देर बाद मुझे लगा, मेरे बगल वाले कमरे में ही  कोई इतनी रात को लेट्रिन कर रहा है. तभी नाक में लेट्रिन की तेज दुर्गन्ध भी आई. फिर थोड़ी देर बाद महसूस हुआ, मेरे ठीक आस पास ही कोई बैठा हुआ है. कमरे में पूरी तरह अँधेरा, दुर्गन्ध साफ़ महसूस हो रहा था. .....और मैं पूरे अनुभव और विश्वास के साथ अपना बायां पैर बिजली की गति में उठाकर चला दिया .......चपाक. मैं लेटे लेटे ही पैर चलाया था और चपाक से किसी को लगा. मैं हड़बड़ा कर उठ बैठा कि, यहाँ बंद कमरे में आदमी कहाँ से ? 

मैंने किसको मारा किसको ?क्योंकि  मेरा पैर जमीन से लगभग १ फिट ऊपर उठा था. मैं अँधेरे में ही माचिस, फिर मोमबत्ती जलाया और मोमबत्ती की प्रकाश में चारोँ तरफ घूर-घूरकर देखने लगा. मगर ऐसा कुछ न दिखा. मैंने सोंचा, ठीक है, सोते है सुबह समझा जाएगा. और मोमबत्ती जैसे ही जमीन पर रखने को हुआ तो देखा चटाई के कोने पर ही ढेर सा लेट्रिन पड़ा है. मैं भयभीत सा हो गया, लेकिन बिना देर किए गुरु मंत्र उच्चारण करते हुए जल्दी जल्दी कपड़े पहना, मोबाईल उठाया, टाइम देखा, बारह बजकर सैतीस मिनट. 

ताला चाबी उठाया, दरवाजे से बाहर हुआ और ताला लगाकर सुनसान सड़क से होते हुए रेलवे स्टेशन की तरफ भागता चला गया. बार बार मेरे पैर में उस जीव या प्रेत के रोयेंदार बदन का अहसास हो रहा था. स्टेशन के बाहर चाय वाले से दो तीन चाय पीकर सुबह किया फिर वापिस दुकान की तरफ लौटा तो अगल 
बगल की दुकाने खुल चुकी थी. मैंने पड़ोसी दुकानदार बंधुओं को रात वाली घटना सुनाया, सब मेरा मुंह ताकने लगे थे. मैंने उन सभी को लेकर अपनी दुकान खोलकर चटाई पर किया हुआ लेट्रिन दिखाया.

सभी के सभी कहने लगे  अशोक भाई, अब जल्दी से जल्दी दुकान खाली कर दो. इस दुकान में भूत, प्रेत और खबिसों की शिकायत पहले भी थी, आज पूरी तरह से बात साफ हो गई. आप बच गए हो यही बहुत है. मैंने कहा, सही बात है. अगर मैं लेट्रिन नहीं देखता तो सो जाता. और जैसे ही मेरी नींद लगती तब ओ मेरा गला आराम से दबा देता. क्योंकि मैंने भी उसे वाकई बहुत जोर का पैर मारा था. वह चुप थोड़े बैठता, बदला तो लेता ही . 
           
          यहाँ निचोड़ ये है कि, सच्चाई के साथ रहने से आपके अन्दर का भय समाप्त हुआ रहता है. और मरता या मारा वही जाता है जो भय करता है. और भय भी तो वही करता है जो दूषित विचार और व्यवहार करता है. आप सच्चाई के साथ रहिए .... और देखिए कैसा पावर इकठ्ठा होता है आपके अन्दर. परिणाम हर बार और बार-बार आपके हक़ में अच्छा ही होगा. 
          अगर आपके जीवन में इस प्रकार की घटना का कभी कोई संदेह हो तो आप डरे नहीं, हिम्मत को मजबूत किए रखिए. कोई आपका कुछ भी बिगाड़ न पाएगा. मैं एक प्रभावशाली महा मंत्र दे रहा हूँ. जो ऐसी स्थिति के लिए बहुत प्रसिद्ध है. जब भी इस तरह की कोई बात हो तो आप इसका मन ही मन उच्चारण करना शुरू कर दीजिए, फिर देखिए कमाल…..   

 तेजस्वी नवार्ण मंत्र  -  
                                 ऐं  ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ।। 
                          
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Thursday, 14 March 2013

सफलता पाने का रहस्य.


          जभी जागो तभी सबेरा 

मैं जो भी कहूँगा सच कहूँगा, सच के सिवा कुछ नही. संयोग से मेरी बात गले न उतरे या असत्य सी लगे तो कोई भी सजा भुगतने पर न तो शर्म करूँगा न दुख.  शोक भैया  8447858941

          बहुत ही अच्छी पुस्तक की रचना की है महान लेखक स्वेट मार्डन ने। हालाँकि स्वेट  मार्डन  की कई पुस्तके मैंने बहुत पहले की पढ़ रखी है। आज वही पुस्तक हाथ लगी तो फिर से पढ़ डाळा। शीर्षक भी दमदार और बातों में भी दम। जब जागो तभी सबेरा तो नवयुवा पीढ़ी को पढ़ ही लेनी चाहिए क्योंकि ऐसी पुस्तक से मन मस्तिष्क को थोक के भाव में ऊर्जा मिलती है। आज की स्थिति में इक्छाशक्ति आत्मविश्वास से हम बिलकुल रिक्त हो चुके। इसमें जब जागो तभी सबेरा जैसी पुस्तक हर किसी को नवशक्ति से चार्ज कर देती है। नकारात्मक सोंच ख़त्म होकर आत्मविश्वास लबालब हो उठता है। 
          
       और जहाँ नकारात्मक सोंच  ख़त्म होने लगता है वही से सकारात्मक सोंच शुरू हो जाती है।  मन मजबूत होने लगता है। असंभव जैसी सोंच धुमिल होने लगती है। सब कुछ संभव हो उठता है। इतनी बातें लिखने के पीछे मकसद  कि आपके अन्दर के टिमटिमाते आत्म विश्वास को बल मिले। आप नए जोश और नई ऊर्जा के साथ आगे बढें तथा जिस मंजिल पर पहुँचने की कसम खा रखी है वहां पहुँच कर ही दम लें। इसे कहते हैं- जो मैं कहता हूँ, कर दिखाता हूँ। हमें पता है, समस्याएँ कदम कदम पर है। लेकिन समाधान भी तो आजू बाजू या अगले कदम पर होता है।
          
       अब निराशा कैसी ? उठिए, जागिए - दुनिया में कोई भी कार्य ऐसा नहीं जो आप न कर सके। असंभव सिर्फ इसलिए लगता है क्योंकि आप कोशिश नहीं करते, या हार जाते हैं। और ये सब होता है आपके नकारात्मक सोंच के चलते। हिम्मत न हारिए, पूरे शरीर में आत्मविश्वास ही ऐसी चीज है जो हमारी  सफलता की रौशनी है। इस रोशनी को जलाए रखिए तो सफ़र आसान भी होगा और सुहाना भी। काश ! मैं आपको विश्वास दिला  पाता कि, मैं भी आपही की तरह से साधारण जीव हूँ। मगर आत्मविश्वास और इक्छाशक्ति के मामले में कुछ अलग। क्योंकि समस्याएँ भी शर्मा जाती हैं मेरे आगे। कारण कि, मैं समस्याओ का भी चिर फाड़ करके रिसर्च करने लग जाता हूँ। वर्दाश्त और धैर्यता का भी प्रयोग ह्रदय से  करता हूँ.
          
        भाई, दुनिया एक प्यारी  जगह है। और यह जीवन एक अवसर है। इस जीवन और अवसर  का सही उपयोग करना ही सर्व श्रेष्ठता है। अब आप सोंचिए, कल से आपको क्या करना है ? मैं तो अभी के अभी सोंच लिया हूँ। क्योंकि अच्छे कार्यों के लिए कोई टाइमिंग नहीं होती। बस शुरू हो जाता हूँ। व्यवस्था खुद ही मेरे साथ टिउनिंग बनाने लग जाती है। और यह जीत आपकी है। अगर आप भी हमारे सोंच के हिसाब से शुरू हो जाते है, हमारे अनुसार शुरू हो जाते हैं तो आप जैसा खुशनसीब कोई न होगा। वैसे तो  ऐसी खुशनसीबी बिना पापड़ बेले मिलती भी नहीं। ये ३ बातें ही आपको सर्व श्रेष्ठ बना सकती है। 
          
       समय के महत्त्व को  समझते हैं तो समय के पाबंद बनिए। 
         
                    झूठ को नापसंद करते हैं तो हमेशा सच बोलने की आदत डालिए। 

                                        हमेशा क्रोध आता है तो ह्रदय से मुस्कराने की जोखिम उठाइए।

 अतः मात्र ३ बातें आपको दुनिया में अलौकिक बना सकती है। लेकिन जब पूरी तरह से इसके अभ्यस्त हो जाएँगे तब। क्योंकि सरल यह भी नहीं है। किसी भी मुश्किल को सरल बनाया जाता है। इनकी आदत डालनी पड़ती है। कई बार कहीं-कहीं झेलना भी पड़ता है। लेकिन जब आदत पड़ जाती है तो आपके अन्दर दिव्य आकर्षण विकसित होना शुरू हो जाता है। जैसे पारसमणि से प्रकाश। एक अदभुत सम्मोहन युक्त व्यक्तित्व। 
          
       आप पुरुष हैं या स्त्री मात्र यही तीन बातें आपके जीवन का महामंत्र, चैतन्य मंत्र है, जिसका उच्चारण नहीं बल्कि चिंतन करने मात्र से आपमें बदलाव आना आरम्भ हो जाता है। और जब काफी कुछ बदल जाता है तब आपको देखने वाला भी ठगा सा रह जाता है, इसमें कोई शक नही। आपसे मिलने वाला सामने पड़ते ही अनायास मुस्करा बैठता है। आपसे बातचीत करने वाला सदा के लिए आप पर भरोसा करने के लिए विवश हो जाता है। क्या आप चाहेंगे कि लोग आप पर भरोसा करें ? तो बस जागिए और सच को स्वीकारिए। जो करना हो, कर दिखाइए। जहाँ दिक्कत हो वहां हमें फोन करिए क्योंकि  ...........
                                  
                 हादसों  के  शहर  में  इक सकुन देखा।
                 सभी गैर थे मगर, अपना ही खून देखा   
          
          हमारा हर संभव सहयोग आपको मिलेगा। क्योंकि .......दुनिया में असंभव कुछ है ही नही।  मैंने इस तथ्य का भी पोस्टमार्टम करके देख लिया है। आप भी देख सकते है। हमारी एक-एक बातें सच मानी जाएगी। यदि अब भी आप संदेह में हैं तो यह आपका दुर्भाग्य है। बहुत बड़ी असफलता है। संदेह से दूर होइए, मन को मजबुत बनाइए, मंजिल आपका इन्तजार कर रही है। अगर मैं गलत कहा तो मेरा गट्टा  पकड़ कर पुछिएगा या आसमान के जिस सितारे को कहिएगा उसे तोड़कर आपके ड्राइंग रूम में सजा दूंगा। और अंत में एक तेजस्वी मन्त्र दे रहा हूँ। किसी भी कार्य में पूरी सफलता के लिए इसका उच्रचारण करते हुए घर से बाहर कदम रखिए तो निश्चित सफल होते रहेंगे।   
                                                         मंत्र - ओम क्रीं क्रीं क्रीं क्रीं 
(नोट- यह आपार हर्ष का विषय है कि, हमने अपने पूर्व सूचना के मुताबिक त्राटक ज्ञान के साथ सम्मोहन, वशीकरण, कुंडलिनी जागरण का 30 से 45 दिनों का विशेष कोर्स जारी कर दिया है। इस दुर्लभ त्राटक सम्मोहन कोर्स को अनेक प्रांतों के भाई बंधु और शुभचिंतक लगन पूर्वक कर रहे हैं। अतः मंगल कामना हैं इनकी सफलता के लिए तथा आपके लिए हार्दिक कामना है आपके आगमन के लिए। क्योंकि आप दुनिया से बहुत कुछ हासिल कर सकते हैं परन्तु ऐसा अद्भुत और दुर्लभ ज्ञान कहीं और से प्राप्त करना बहुत ही कठिन है। नामुमकिन भी मान लीजिये। इस सम्बन्ध में किसी भी जानकारी के लिएआप बेहिचक हमें फोन कर सकते हैं। आपको हमारा भरपूर सहयोग प्राप्त होगा, भरोसा रखें।

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                                                                               सधन्यवाद !
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